Wednesday, June 16, 2021

डबल लिफ्ट और सिंगल सिलेंडर जैक्वार्ड शेडिंग मैकेनिज्म ( Double lift single cylinder jacquard shedding mechanism )

 डबल लिफ्ट और सिंगल सिलेंडर जैक्वार्ड शेडिंग मैकेनिज्म


डबल लिफ्ट और सिंगल सिलेंडर जेकक्वार्ड की संरचना: 


डबल लिफ्ट जेकक्वार्ड तंत्र में दो ग्रिफ का उपयोग किया जाता है। प्रत्येक ग्रिफ पर आठ नाइफ  लगे होते हैं। डबल लिफ्ट जेकक्वार्ड में, एक वार्प एन्ड  के लिए दो हुक का उपयोग किया जाता है। पेयरिंग लिंक के माध्यम से दोनों हुक एक दूसरे से जुड़े  होते  हैं। चयन नीडल  में दो किंक होते हैं। ये दो किंक (आंखें) दो हुक  से एंगेज्ड  होती  हैं। प्रेशर स्प्रिंग को नीडल  के पिछले सिरे पर फिट किया जाता है। यह स्प्रिंग  नीडल  को सिलेंडर की ओर धकेलता है। नीडल  का अगला सिरा नीडल  बोर्ड के होल से होकर गुजरता है। नीडल  के सामने के छोर के सामने एक पैटर्न सिलेंडर लगा होता है। हुक का दोहरा सिरा एक स्लॉटेड  ग्रिड पर टिका होता है। दो हुक आपस में जुड़े होते  हैं। नेक कॉर्ड का ऊपरी सिरा पेयरिंग लिंक से जुड़ा  होता  है। नैक कॉर्ड  का निचला सिरा सबसे पहले टग बोर्ड के छेद से होकर गुजरता है। नेक कॉर्ड का निचला सिरा एस-लिंक के माध्यम से हार्नेस कॉर्ड के ऊपरी सिरे से जुड़ा होता है। हार्नेस कॉर्ड का निचला सिरा कोम्बर  बोर्ड के छेद से होकर गुजरता है। इस हार्नेस कॉर्ड का निचला सिरा हील्ड वायर के ऊपरी सिरे से जुड़ जाता है। हेल्ड वायर  के निचले सिरे पर एक लिंगो (डेड वेट) लटकाया जाता  है।

डबल लिफ्ट और सिंगल सिलेंडर जैक्वार्ड शेडिंग तंत्र का कार्य सिद्धांत:


डबल लिफ्ट और सिंगल-सिलेंडर जेकक्वार्ड  लूम के बॉटम  शाफ्ट के माध्यम से गति प्राप्त करते हैं। करघे के बॉटम  शाफ्ट पर एक स्प्रोकेट व्हील लगा होता है। यह स्प्रोकेट व्हील एक चेन के माध्यम से जैक्वार्ड शाफ्ट पर लगे दूसरे स्प्रोकेट व्हील से जुड़ा है। एक्सेंट्रिक  कैम ग्रिफ़्स को ऊपर और नीचे की गति प्रदान करते हैं। दोनों ग्रिफ़ एक रेसिप्रोकेटिंग  गति करते हैं। जब एक ग्रिफ़ जेकक्वार्ड के बॉटम डेड सेण्टर  पर पहुँचता है, तो दूसरा ग्रिफ़ जेकक्वार्ड के टॉप डेड सेण्टर  की स्थिति में पहुँच जाता है। जेकक्वार्ड शाफ्ट की आधी चक्कर  के बाद दोनों ग्रिफ अपनी स्थिति बदल लेते  हैं। कार्ड में छेदों के छिद्रण के अनुसार हुक का चयन तब होता है जब ग्रिफ बॉटम डेड सेण्टर  तक पहुंच जाता है। पैटर्न सिलेंडर नीडल  के सामने के सिरों को धक्का देता है। यदि कार्ड में छेद किया होता  है, तो नीडल  का अगला सिरा छिद्रित पैटर्न सिलेंडर में प्रवेश कर जाता  है और संबंधित हुक संबंधित नाइफ के ऊपर  आ  जाता है। यदि कार्ड में कोई होल नहीं होता  है, तो संबंधित नीडल  स्प्रिंग बॉक्स की ओर धकेल दी जाती है और संबंधित हुक नाइफ  से अलग हो जाता है। रेसिप्रोकेटिंग मोशन करता  ग्रिफ़  नाइफ के ऊपर आये हुए हुक्स  को ऊपर की तरफ  ले जाता  हैं। चूंकि हुक नेक कॉर्ड और हार्नेस कॉर्ड के माध्यम से हील्ड वायर से जुड़ जाता है जिससे कि हील्ड वायर भी हुक के साथ ऊपर की दिशा में चला जाता है। इस प्रकार हील्ड वायर की आंख के माध्यम से खींचा गया वार्प का धागा  ऊपर की तरफ उठ  जाता है। लिंगो हुक को नीचे की स्थिति में लाता है। जेकक्वार्ड के आधे चक्कर के बाद, हुक का दूसरा सेट डिजाइन के अनुसार दूसरे ग्रिफ़ के ऊपर आ  जाता है, और यह ग्रिफ़ नाइफ के ऊपर आये हुए  हुक को ऊपर की दिशा में ले जाता है। इस जेकक्वार्ड में सेमी ओपन शेड  बनता  है। एक सिरे को उठाने के लिए दो हुक का उपयोग किया जाता है।

Tuesday, June 15, 2021

डबल-लिफ्ट और डबल-सिलेंडर जैक्वार्ड शेडिंग मैकेनिज्म ( Double lifts and double cylinders jacquard shedding mechanism )

 डबल-लिफ्ट और डबल-सिलेंडर जैक्वार्ड शेडिंग मैकेनिज्म:


डबल-लिफ्ट और डबल-सिलेंडर जेकक्वार्ड शेडिंग तंत्र की संरचना:

इस जेकक्वार्ड शेडिंग तंत्र में दो ग्रिफ़ का उपयोग किया जाता है। पहले ग्रिफ़ पर आठ नाइफ और दूसरे ग्रिफ़ पर आठ नाइफ लगे होते हैं। पहला ग्रिफ़ विषम संख्या वाले हुक को ऊपर की ओर ले जाता है और दूसरा ग्रिफ़ सम संख्या वाले हुक को ऊपर की दिशा में ले जाता है। इस जेकक्वार्ड शेडिंग मैकेनिज्म में दो तरह के हुक का इस्तेमाल किया जाता है। विषम संख्या हुक के ऊपरी सिरे विषम संख्या हुक के चयन के लिए उपयोग किए जा रहे पैटर्न सिलेंडर की ओर झुकें होते हैं और सम संख्या हुक के ऊपरी सिरे सम संख्या हुक के चयन के लिए उपयोग किए जा रहे पैटर्न सिलेंडर की ओर झुक जाते हैं। इस तंत्र में उपयोग किए गए हुकों की संख्या जेकक्वार्ड की फीगरिंग की क्षमता से सिर्फ दोगुनी है। 400 फिगरिंग क्षमता जैक्वार्ड के लिए 800 हुक का उपयोग किया जाता है। इस जेकक्वार्ड में हुक चयन को नियंत्रित करने के लिए नीडल्स के दो सेट का उपयोग किया जाता है। नीडल ई विषम संख्या हुक के चयन को नियंत्रित करती है जबकि नीडल सी सम संख्या हुक के चयन को नियंत्रित करती है। प्रत्येक सुई का अगला सिरा A और B संबंधित नीडल बोर्डों के छिद्रों से होकर गुजरता है। स्प्रिंग बॉक्स सुई ई और सी के पिछले सिरों के ठीक पीछे लगे होते हैं। प्रत्येक नीडल के पीछे के छोर पर लगे प्रेशर स्प्रिंग्स नीडल को संबंधित पैटर्न सिलेंडर की ओर धकेलते हैं। नीडल बोर्डों के सामने दो पैटर्न  सिलेंडर लगे होते हैं। एक पैटर्न सिलेंडर विषम संख्या की पिक्स के लिए हुक का चयन करता है और दूसरा पैटर्न सिलेंडर सम संख्या के पिक्स के लिए हुक का चयन करता है। विषम संख्या का एक हुक और सम संख्या का एक हुक लिंक के माध्यम से जोड़ा जाता है। प्रत्येक हुक का दोहरा सिरा स्लॉटेड ग्रिड पर टिका होता है। नेक कॉर्ड का ऊपरी सिरा पेयरिंग लिंक से जुड़ा होता है। यह नेक कॉर्ड टग बोर्ड के होल से होकर गुजरता है फिर नेक कॉर्ड का निचला सिरा हार्नेस कॉर्ड के ऊपरी सिरे से जुड़ जाता है। अब हार्नेस कॉर्ड कोम्बर बोर्ड के छेद से होकर गुजरता है। इस हार्नेस कॉर्ड का निचला सिरा हील्ड वायर के ऊपरी सिरे से जुड़ा होता है। एक लिंगो ठीक हील्ड वायर के निचले सिरे से जुड़ा होता है।



डबल-लिफ्ट और डबल-सिलेंडर जेकक्वार्ड तंत्र का कार्य सिद्धांत:


यह तंत्र निचले शाफ्ट के माध्यम से घूर्णन गति प्राप्त करता है। एक स्प्रोकेट व्हील नीचे वाले शाफ्ट पर लगा होता है जबकि दुनी संख्या में दांतों वाला दूसरा स्प्रोकेट व्हील जैक्वार्ड शाफ्ट पर लगा होता है। ये स्प्रोकेट व्हील एक अंतहीन चैन के माध्यम से एक दूसरे से जुड़े होते हैं। जेकक्वार्ड पर लगे एक्सेंट्रिक कैम के माध्यम से ग्रिफ़्स रेसिप्रोकेटिंग गति प्राप्त करते हैं। जब पहली ग्रिफ़ जेकक्वार्ड के टॉप डेड सेण्टर तक पहुँचती है, तो दूसरी ग्रिफ़ जेकक्वार्ड के बॉटम डेड सेण्टर तक पहुँचती है। जब जैक्वार्ड शाफ्ट घूमता है, तो दोनों ग्रिफ एक दूसरे को पार करते हैं। जब ग्रिफ़ बॉटम डेड सेण्टर की स्थिति में पहुँचता है, तो यह हुक के ऊपरी झुकाव वाले सिरे की तुलना में थोड़ा नीचे आता है। अब पैटर्न सिलेंडर नीडल के सामने के छोर को धक्का देता है। यदि कार्ड में छेद किया होता है, तो नीडल का अगला सिरा छिद्रित पैटर्न वाले सिलेंडर के छेद में प्रवेश कर जाता है और वह हुक नाइफ के ऊपर आ जाता है। यदि डिज़ाइन कार्ड में कोई होल नहीं होता है, तो नीडल स्प्रिंग बॉक्स की ओर धकेल दी जाती है और हुक नाइफ के ऊपर से हट जाता है। जब ग्रिफ़ बॉटम डेड सेण्टर की स्थिति से टॉप डेड सेण्टर की स्थिति तक यात्रा करना शुरू करता है, तो यह नाइफ के साथ इंगगे हुए हुक को ऊपर की दिशा में ले जाता है। दूसरा ग्रिफ़ अब बॉटम डेड सेण्टर की स्थिति में पहुँचता है। दूसरा पैटर्न सिलेंडर नीडल के सामने के छोर को धक्का देता है और हुको का चयन होता हैं। जब दूसरा ग्रिफ़ ऊपर की ओर बढ़ता है, तो वह नाइफ के साथ  एंगेज हुए हुक को ऊपर की ओर ले जाता है। दायीं ओर का पैटर्न सिलेंडर विषम पिक संख्या का चयन करता है जबकि बायीं ओर का सिलेंडर सम पिक संख्या  का चयन करता है।

चूंकि हील्ड वायर का ऊपरी सिरा नेक कॉर्ड और हार्नेस कॉर्ड के माध्यम से हुक पेयरिंग लिंक से जुड़ जाता है ताकि नेक कॉर्ड और हार्नेस कॉर्ड हील्ड वायर को ऊपर की दिशा में उठा सके। लिंगो हुक को नीचे की स्थिति में लाता है। इस जेकक्वार्ड में दो अलग-अलग पैटर्न की चेन तैयार की जाती है। विषम संख्या की पिक की एक चैन दायीं ओर के पैटर्न सिलेंडर पर लगाई जाती है, जबकि पैटर्न सिलेंडर के बाईं ओर सम संख्या की पिक की एक और चैन लगाई जाती है। दोनों चैनों में पिक्स की संख्या बराबर होनी चाहिए

वर्डोल जेकक्वार्ड या फाइन पिच जैक्वार्ड शेडिंग मैकेनिज्म ( verdol jacquard or fine pitch jacquard shedding mechanism )

 वर्डोल जेकक्वार्ड या फाइन पिच जैक्वार्ड शेडिंग मैकेनिज्म:

यह सभी यांत्रिक जैक्वार्ड में एक उन्नत और कॉम्पैक्ट जैक्वार्ड शेडिंग तंत्र होता  है। इस जेकक्वार्ड में बड़ी  फ़िगरिंग  क्षमता होती  है। इस जेकक्वार्ड शेडिंग मैकेनिज्म में 1344 हुक लगे होते  है। हल्के वजन वाले प्लास्टिक पेपर कार्ड के कारण लंबी पैटर्न की चेन का उपयोग किया जा सकता है। यह जेकक्वार्ड करघे के प्रति मिनट उच्च आरपीएम   पर काम कर सकता है।

वर्डोल जेकक्वार्ड या फाइन पिच जेकक्वार्ड शेडिंग तंत्र की संरचना:

इस तंत्र में डबल-एक्टिंग हुक का उपयोग किया जाता है। हुक के ऊपरी सिरे पर दो झुकाव बैंड होते हैं। ये बैंड एक ही दिशा में झुके  होते  हैं। हुक के बीच में हुक से एक नौच  जुड़ा होता है। हुक की सोलह पंक्तियों का उपयोग किया जाता है और एक पंक्ति में 84 हुक होते हैं। नीचे की स्थिति में पहुंचने पर हुक टग बोर्ड पर रेस्ट करता  है। नैक कॉर्ड के ऊपरी सिरे को टग बोर्ड के छेद से गुजारा जाता है। नेक कॉर्ड का निचला सिरा हार्नेस कॉर्ड के ऊपरी सिरे से जुड़ा होता है। हार्नेस कॉर्ड का निचला सिरा कोम्बर  बोर्ड के छेद से होकर गुजरता है और फिर हील्ड वायर के ऊपरी सिरे से जुड़ जाता है। हील्ड वायर का निचला सिरा स्प्रिंग बोर्ड पर लगे रिवर्सिंग स्प्रिंग से जुड़ा होता है। दोहरी आंखों वाली मुख्य नीडल  का उपयोग प्रत्येक हुक के चयन को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है। प्रत्येक डबल किंक नीडल  के पीछे के छोर पर एक प्रेशर स्प्रिंग लगा होता है। यह दबाव किंक नीडल   को पैटर्न सिलेंडर की ओर धकेलती है। कुल सोलह डबल किंक नीडल्स  का उपयोग किया जाता है। प्रत्येक सुई का अगला सिरा नीडल  बोर्ड के छेद से होकर गुजरता है। प्रत्येक  डबल किंक नीडल  के सामने एक पुशर नीडल लगाई  जाती है। पुशर नीडल  ड्रॉपर सुई की गोल आंख से गुजरती है। प्रत्येक ड्रॉपर नीडल  के ऊपरी सिरे पर एक प्रेशर स्प्रिंग लगा होता है। ड्रॉपर नीडल  का निचला सिरा नीडल  प्लेट के छेद से होकर गुजरता है। पुशर नीडल  के धक्का देने वाले सिरे के सामने एक प्रेशर ग्रिड लगा होता है। प्रेशर ग्रिड में 16 प्रेशर बार होते हैं। ड्रॉपर नीडल  प्लेट के ठीक नीचे एक निश्चित छिद्रित पैटर्न वाला सिलेंडर लगा होता है। पैटर्न सिलेंडर में एक शाफ्ट होता है जिस पर खूंटीदार  पहिये लगे होते हैं। छिद्रित पैटर्न कार्ड पैटर्न सिलेंडर पर लगाया जाता है। छिद्रित पेपर कार्ड सिलेंडर शाफ्ट पर लगे खूंटीदार  पहियों की मदद से घुमाया जाता है। सिलिंडर शाफ्ट के एक सिरे पर जिनेवा व्हील लगा होता है। जिनेवा व्हील साइड शाफ्ट पर लगे क्रैंक के माध्यम से रुक रुक कर  घूर्णन गति प्राप्त करता है।

जेकक्वार्ड शाफ्ट पर दो ग्रिफ लगे होते हैं। ग्रिफ़्स को रेसिप्रोकेटिंग  गति प्रदान करने के लिए एक्सेंट्रिक  कैम का उपयोग किया जाता है। एक  स्प्रोकेट व्हील को जेकक्वार्ड शाफ्ट पर लगाया जाता है  यह स्प्रोकेट व्हील  एक दूसरे  स्प्रोकेट व्हील से जुड़ा होता है यह व्हील लूम के मैं शाफ़्ट पर लगा होता है लूम शाफ़्ट में लगे व्हील के दांते जैक्वार्ड शाफ़्ट पर लगे व्हील के दांतो से आधे होते हैं।

वर्डोल जेकक्वार्ड या फाइन पिच जेकक्वार्ड शेडिंग मैकेनिज्म का कार्य सिद्धांत:

जब निचला शाफ्ट घूमता है, तो जेकक्वार्ड शाफ्ट भी उसी दिशा में घूमता है। घूमने वाले एक्सेंट्रिक  कैम ग्रिफ़्स को रेसिप्रोकेटिंग  गति प्रदान करते हैं। जब पहला ग्रिफ़ बॉटम डेड सेण्टर  की स्थिति में पहुँचता है, तो दूसरा ग्रिफ़ टॉप डेड सेण्टर  की स्थिति में जाता है। जेकक्वार्ड शाफ्ट की आधी चक्कर  के बाद ग्रिफ़्स की स्थिति आपस में बदल जाती है। जब बॉटम डेड सेण्टर  की स्थिति में पहुँचता है, तो नाइफ  के शीर्ष किनारे हुक के ऊपरी बैंड सिरों से थोड़ा नीचे आते हैं। अब ड्रॉपर नीडल  छिद्रित पैटर्न सिलेंडर पर लगे छिद्रित डिज़ाइन कार्ड को दबाती है। यदि डिज़ाइन कार्ड में कोई छेद है, तो ड्रॉपर नीडल  पैटर्न सिलेंडर के छेद में प्रवेश कर जाती है। पुशर नीडल  की स्थिति अपरिवर्तित रहती है। पुशिंग नीडल  को  धक्का देने वाला सिरा प्रेशर ग्रिड में मौजूद खुले स्थान के सामने आता है। यदि कार्ड में कोई छेद नहीं है, तो ड्रॉपर नीडल  ऊपर की दिशा में जाती है और ड्रॉपर नीडल  से जुड़ी पुशिंग नीडल को  धक्का देने वाला सिरा  ठोस प्रेशर बार  के सामने जाता है। अब प्रेशर ग्रिड पुशर नीडल को धक्का देता है। यदि पुशर नीडल  को धक्का दिया जाता है, तो किंक नीडल को भी  साथ साथ धक्का लगता  है और संबंधित नीडल  में लगा हुआ हुक नाइफ  से निकल जाता है। यदि पुशर नीडल  दबाव ग्रिड द्वारा प्रेस नहीं होती है, तो पुशर नीडल और किंक नीडल  की स्थिति अपरिवर्तित रहती है और संबंधित हुक नाइफ  क्र ऊपर आ  जाता है। सम्बन्धित  ग्रिफ़ इस  हुक को ऊपर की दिशा में ले जाता है।

जब पहली ग्रिफ़ टॉप डेड सेण्टर  तक पहुँचती है, तो दूसरी ग्रिफ़ अपने बॉटम डेड सेण्टर  तक पहुँचती है। अब हुक का चयन फिर से होता है।

यदि हुक को दो या अधिक बार ऊपर की स्थिति में रखने की आवश्यकता होती है तो यह ऊपर की स्थिति में रहता है और रेस्ट  नाइफ  पर टिका रहता  है। हुक की नौच रेस्ट नाइफ पर तिकी रहती है  है। जब पैटर्न हुक को नीचे लाने की मांग करता है, तो वह हुक रेस्ट नाइफ से अलग हो जाता है।

चूंकि हुक को नेक कॉर्ड और हार्नेस कॉर्ड के माध्यम से हील्ड वायर से जोड़ा जाता है ताकि संबंधित हुक से जुड़ा हील्ड वायर ऊपर की दिशा में जाए। इस तरह शेड का निर्माण होता है। हील्ड वायर के निचले सिरे पर लगा  प्रेशर स्प्रिंग हुक को नीचे की स्थिति में लाता है।

जब जैक्वार्ड एक चक्कर लगाता है, तो पैटर्न कार्ड दो बार के लिए अपनी स्थिति बदलता है। पैटर्न कार्ड खूंटीदार  पहियों पर लगा होता है। जब जिनेवा पहिया पार्शियल  कोणीय गति प्राप्त करता है, तो यह सिलेंडर शाफ्ट को घुमाता है। चूंकि खूंटीदार  पहिये सिलेंडर शाफ्ट पर लगे होते हैं ताकि घूमने वाले खूंटेदार पहिये कार्ड की स्थिति को बदल दें।

जब लूम दो चक्कर घूमती है तो यह जैक्वार्ड एक चक्कर घूमता हैl

Monday, June 14, 2021

निट फैब्रिक के प्रकार और नीटिंग प्रोसेस में प्रयोग होने बाले विभिन्न टेक्निकल पद ( Tyes of knit fabrics and different technical terms used in knitting process)

निट फैब्रिक के प्रकार और  नीटिंग प्रोसेस में प्रयोग होने बाले  विभिन्न टेक्निकल पद:

 निट  वस्त्र :

 यार्न के लूप्स के आपस में इंटरमेश होने के बाद बनाने वाले कपड़े को निट फैब्रिक के नाम से जाना जाता है । जब एक लूप को दूसरे लूप के बीच से खींचा जाता है, तो एक स्टिच बनता है। ये स्टिच  या तो क्षैतिज दिशा में या ऊर्ध्वाधर दिशा में बनते हैं। एक लूप निट फैब्रिक का एक मूल तत्व है। एक निट  कपड़े की संरचना नीचे दी गई है:

यार्न लूप:

लूप यार्न की एक लंबाई है जिसे एक घुमावदार आकार में परिवर्तित  किया जाता है। पूरे लूप को तीन भागों में विभाजित किया जा सकता है। आप नीचे दिए गए चित्र में देख सकते हैं:

1 - लूप टॉप

2 - लूप साइड और बॉटम

3 - आधा इंटरलूप

इंटरलूप:

इंटरलूप वह धागा है जो लगातार दो लूपों को एक साथ जोड़ता है। निट  कपड़ा की एक विशिष्ट संरचना में या तो क्षैतिज या ऊर्ध्वाधर लूप बनते हैं।

निट  कपड़ा का वर्गीकरण:

 निट  कपड़ा दो श्रेणियों में वर्गीकृत किया जा सकता है

1 - वेफ्ट निट  कपड़ा।

2 - वार्प निट  कपड़ा।

वेफ्ट निट  कपड़ा:

इंटरलूप, वेफ्ट  निट फैब्रिक में क्षैतिज रूप से रखे गए दो लगातार लूप्स को जोड़ता है। जब वेफ्ट निट  कपड़े में एक लूप टूट जाता है, तो पूरी संरचना को केवल यार्न के मुक्त सिरे को खींचकर खोला या पूर्ववत अवस्था में  किया जा सकता है।

वार्प निट  कपड़ा:

इंटरलूप, वार्प निट  हुए कपड़े में लंबवत या तिरछे रखे दो लगातार छोरों को जोड़ता है। एक साथ कई धागों का उपयोग करना और विभिन्न धागों द्वारा गठित छोरों को एक साथ बांधने की अनुमति देना आवश्यक होता  है।

 नीटिंग प्रोसेस में प्रयोग होने बाले  विभिन्न टेक्निकल पद:

खुला लूप:

वह लूप जिसमें लूप बनाने वाला यार्न लूप के नीचे से क्रॉस नहीं करता है।


बंद लूप:

बंद-लूप में, लूप के पैर क्रॉस करते हैं ताकि लूप बंद हो जाए।

फेस लूप:

जब लूप बनने के दौरान नया लूप पुराने लूप से पीछे से चेहरे या सामने की तरफ बाहर निकलता है, तो इस तरह के लूप को फेस लूप या वेफ्ट  निट लूप के रूप में जाना जाता है।


बैक  लूप:

यदि लूप बनने के दौरान नया लूप फेस साइड से पुराने लूप के पीछे की तरफ जाता है, तो इस तरह के लूप को बैक लूप या वेफ्ट  पर्ल लूप कहा जाता है।

निट फैब्रिक  का तकनीकी फेस :

निट  कपड़े की  वह सतह  जिसमें सभी फेस  या निट  लूप होते हैं, निट   कपड़े का तकनीकी फेस  कहलाता  है।


निट  कपड़ा की तकनीकी बैक:

निट  कपड़ा की  वह सतह  जिसमें बैक या पर्ल लूप दिखाई देते हैं, फैब्रिक का टेक्निकल बैक कहलाते हैं।

सुई लूप:

सूत को खींचने वाली सूई द्वारा निर्मित लूप के ऊपरी भाग को सुई लूप कहते हैं।


सिंकर लूप:

निट लूप के निचले हिस्से को तकनीकी रूप से सिंकर लूप कहा जाता है। यह पार्श्व में पड़े पड़ोसी स्टिच  से संबंधित दो पैरों का कनेक्शन है।


कोर्सेज:

लूपों की श्रृंखला जो क्षैतिज रूप से, लगातार जुड़ी रहती है, कोर्स  कहलाती है।

वेल्स:

छोरों की श्रृंखला जो लंबवत रूप से जुडी होती  है, वेल्स के रूप में जानी जाती है।

स्टिच  घनत्व:

कपड़े के प्रति इकाई क्षेत्र में स्टीट्चेस  की संख्या को स्टिच  घनत्व कहा जाता है।

ओवर लैप :

यह शब्द मुख्य रूप से वार्प नीटिंग को संदर्भित करता है। सुई के सामने की तरफ (हुक की तरफ) गाइड बार के पार्श्व मूवमेंट  को ओवरलैप कहा जाता है। यह मूवमेंट  आम तौर पर एक सुई स्थान तक ही सीमित है।

अंडर लैप :

यह शब्द वार्प नीटिंग  को भी संदर्भित करता है। सुई के पीछे की ओर गाइड बार के पार्श्व मूवमेंट  को अंडर लैप कहा जाता है। सुई की जगह से संबंधित यह मूवमेंट  कपड़े के निर्माण के अनुसार परिवर्तनशील है।

सिंगल जर्सी:

सुइयों के एक सेट (ट्यूबलर या फ्लैट दोनों में) के साथ निर्मित  हुए  निट कपड़े को सिंगल जर्सी या प्लैन निट  कपड़ा कहा जाता है। इसमें या तो फेस लूप या बैक लूप होते हैं।

डबल जर्सी:

निट  कपड़ा (ट्यूबलर और फ्लैट दोनों) दो-सुई बेड में उल्लिखित सुइयों के दो सेट के साथ उत्पन्न होता है जिसे डबल जर्सी या डबल निट फैब्रिक कहा जाता है। इसका निर्माण फेस और बैक लूप्स द्वारा एक साथ किया गया है।

खोखली स्पिंडल से कताई विधि (रैप स्पिनिंग प्रक्रिया) or hollow spindle spinning method

 खोखली  स्पिंडल से  कताई विधि (रैप स्पिनिंग  प्रक्रिया):


रैप स्पिनिंग प्रोसेस:

रैप स्पिनिंग एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें समानांतर  ड्राफ्टेड  तंतुओं के स्ट्रैंड को फाइबर्स या फिलामेंट यार्न के द्वारा फाबइर स्ट्रैंड के चारो तरफ लपेटा जाता है  फाइबर स्ट्रैंड से निकलने वाले सतह के तंतुओं या एक सतत फिलामेंट या फिलामेंट्स को फाइबर स्ट्रैंड के चारो ऒर लपेटने से फाइबर स्ट्रैंड के फाइबर आपस में ही  वाइंड हो जाते है और फाइबर स्लिपेज नहीं होता  है। रैपिंग फिलामेंट रैप स्पिनिंग प्रक्रिया से बनने  बाले यार्न को सुसंगतता और मजबूती प्रदान करता है।

रैप स्पिनिंग  प्रक्रिया में अनुप्रयोगों की एक विस्तृत श्रृंखला के साथ उच्च गुणवत्ता वाले विशिष्ट यार्न का उत्पादन किया जाता है।



रैप्ड  यार्न में दो घटक होते हैं। पहले घटक में यार्न कोर में स्टेपल फाइबर का स्ट्रैंड  तैयार किया जाता है। दूसरा घटक एक फिलामेंट है जो ड्राफ्ट किए गए फाइबर स्ट्रैंड के चारों ओर लपेटा जाता है।

रैप्ड  यार्न  के उत्पादन के लिए खोखली  स्पिंडल  कताई विधि( होलो स्पिंडल स्पिनिंग मेथड ) का सबसे अधिक उपयोग किया जाता है।

खोखली  स्पिंडल कताई विधि:

खोखली  स्पिंडल  कताई विधि का पूरा तंत्र चार वर्गों में विभाजित किया जा सकता है:

 - रोलर ड्राफ्टिंग तंत्र।

 - खोखली  धुरी ( होलो स्पिंडल )।

 - डिलीवरी रोलर्स और पैकेज बिल्डिंग मैकेनिज्म की जोड़ी।

रोलर ड्राफ्टिंग तंत्र:

ड्राफ्टिंग  रोलर तंत्र में रोलर्स की एक श्रृंखला होती है। ये ड्राफ्टिंग रोलर्स संसाधित होने वाले फाइबर स्ट्रैंड की प्रति यूनिट लंबाई के रैखिक घनत्व या वजन को कम करते हैं।

३/३  या ४/४  रोलर ड्राफ्टिंग असेंबली 5 - 59 की ड्राफ्ट रेंज के साथ क्लैम्पिंग पॉइंट या ड्राफ्ट विधियों के चयन की अनुमति देती है। 50 - 220 मिमी के बीच  लंबाई के फाइबर्स को प्रभावी ढंग से संसाधित किया जा सकता है। दोषों की पहचान करने और यार्न की गुणवत्ता में सुधार के लिए इलेक्ट्रॉनिक निगरानी का उपयोग किया जाता है। ड्राफ्टिंग असेंबली की विशेष विशेषताओं में कताई त्रिकोण के स्पिंडल  के केंद्र में स्वतः संरेखण  और ड्राफ्टिंग  रोलर्स पर निरंतर सक्शन  शामिल है, जो रोलर लैपिंग को समाप्त करता है और कताई क्षेत्र में स्वयं-सफाई में सहायता करता है। न्युमेटिक  थ्रेडिंग खोखली  स्पिंडल के लिए एक वैकल्पिक अरेंजमेंट होता  है और ऑपरेटिंग समय को गति देता है। धागा टूटने  पर स्पिंडल को रोकने के लिए  और एंड-ब्रेक का पता लगाने के लिए मशीन एक  फोटोइलेक्ट्रिक सेल मॉनिटर से सुसज्जित होती है।

खोखली  स्पिंडल  तंत्र ( होलो स्पिंडल सिस्टम):

खोखली स्पिंडल को  आभासी  ट्विस्टिंग असेंबली के रूप में डिज़ाइन किया जाता  है। फाइबर स्ट्रैंड सीधे स्पिंडल में प्रवेश करने के तुरंत बाद, ऊर्ध्वाधर स्पिंडल में प्रवेश करने के बाद सीधे नहीं गुजरता है; इस स्ट्रैंड को स्पिंडल परिधि के लगभग एक-चौथाई हिस्से की लपेट के साथ स्पिंडल के चारों ओर बार-बार बाहर ले जाया जाता है। इस प्रकार, जैसे-जैसे स्पिंडल घूमता है, स्ट्रैंड को ड्राफ्टिंग व्यवस्था और खोखली  स्पिंडल के हेड  के बीच एक मोड़टर्न्स ( ट्विस्ट ) प्रदान किया जाता है। आभासी ट्विस्टिंग  सिद्धांत के अनुसार स्पिंडल हेड में ट्विस्ट के इन टर्न्स  को फिर से अनट्विस्ट   कर दिया जाता है। यह ट्विस्ट  फिलामेंट के साथ लपेटने वाले फिलामेंट स्टेपल फाइबर से पहले स्ट्रैंड को लंबाई में अलग होने से रोकता है।

एक रैप स्पन  यार्न में स्टेपल फाइबर के अनट्विस्ट समानांतर बंडल होते हैं जो चित्र 2 में दिखाए गए अनुसार हेलिकली  रैप्ड फिलामेंट द्वारा एक साथ रखे जाते हैं। यार्न में फिलामेंट का अनुपात लगभग 2 - 5% तक होता  है। फिलामेंट के पेचदार लपेटने  और रेडियल दबाव  के कारण, अलग-अलग स्टेपल फाइबर के बीच आवश्यक सामंजस्य में सुधार होता है। यह धागे को वांछित शक्ति प्रदान करता है। एक मानक पीएल यार्न में प्रति यूनिट लंबाई में ट्विस्ट  की संख्या लगभग  रिंग स्पन यार्न में ट्विस्ट  की मात्रा के समान होती है।

पैकेज निर्माण तंत्र  और डिलीवरी  रोलर्स  की जोड़ी:

यार्न को आगे की और बढ़ाने के लिए  डिलीवरी रोलर्स की एक जोड़ी उपयोग की जाती  है

डिलीवरी रोलर्स द्वारा प्राप्त यार्न को एक यार्न पैकेज पर लपेटा जाता  है। एक बार जब यार्न खोखली  स्पिंडल और डिलीवरी रोलर्स को छोड़ कर आगे की तरफ बढ़ता  है, तो यह एक ट्रैवर्स गाइड से होकर गुजरता है। यह ट्रैवर्स गाइड यार्न को पैकेज के  एक तरफ से दूसरी तरफ क्षैतिज रूप सेथ वितरित करता है। जब एक परत पूरी हो जाती है, तो अगली परत शुरू हो जाती है। ट्रैवर्स गाइड का उपयोग खोखली  स्पिंडल और बोबिन के बीच एक कनेक्शन के रूप में किया जाता है जहां यार्न संग्रहीत किया जाता है।

Sunday, June 13, 2021

नीटिंग की प्रक्रिया में स्टिच की परिभाषा और वेफ्त नीटिंग की प्रक्रिया में विभिन्न प्रकार के स्टिचेस (Definition of a stitch in knitting process and different type of stitches in weft knitting process)

 नीटिंग  की प्रक्रिया में स्टिच  की परिभाषा और वेफ्टनीटिंग की प्रक्रिया में विभिन्न प्रकार के स्टिचेस:


नीटेड फैब्रिक में  स्टिच की परिभाषा:

किसी भी नीटेड फैब्रिक की सबसे छोटी स्थिर आयामी इकाई को स्टिच के रूप में जाना जाता है। इसमें एक यार्न लूप होता है जिसे एक और स्टिच  या लूप के साथ जोड़कर एक साथ रखा जाता है। स्टिच में एक सिर, दो पैर और दो लेग्स  होते हैं।


वेफ्ट नीटिंग की प्रक्रिया में विभिन्न प्रकार की स्टिचेस का निर्माण:

वेफ्ट नीटिंग की प्रक्रिया में बनने वाले विभिन्न स्टिचेस नीचे दिए गए हैं:

निट स्टिच  या प्लैन स्टिच:

जब सुई के हुक वाले हिस्से में सूत प्राप्त करने के लिए कैमिंग क्रिया द्वारा सुई को पर्याप्त ऊंचा उठाया जाता है और पुराना लूप लैच  के नीचे होता है। जैसे ही सुई नीचे आती  है, निट बनती है। प्लैन या निट  स्टिच  की संरचना नीचे दी गई है:

पर्ल स्टिच:

जब ओल्ड स्टिच के लेग्स नव निर्मित स्टिच के  नीचे होते हैं और फ़ीट  नव निर्मित स्टिच  के ऊपर होते हैं, तो इस प्रकार की स्टिच  को पर्ल स्टिच  कहा जाता है।



टक स्टिच :

जब सुई को हुक में सूत प्राप्त करने के लिए कैमिंग क्रिया द्वारा उठाया जाता है, तो इसे लैच  के नीचे पहले से बने लूप को क्लियर  करने के लिए पर्याप्त ऊंचा नहीं उठाया जाता है। सुई को हुक में दो लूप मिलते हैं। इस स्थिति में, टक स्टिच  तब बनती है जब वह अगले कोर्स में बुनती है।

एकल सुई साफ होने से पहले लगातार टक सकती है जिसके परिणामस्वरूप ऊर्ध्वाधर टक होता है जो कई कोर्सेज  के लिए एक घाटी के साथ फैलता है। चार कोर्सेज  अधिकतम सीमा हैं अन्यथा लूप कड़े हो जाते हैं और यार्न टूट जाता है। आसन्न सुई को टक करके एक क्षैतिज टक स्टिच  बनाना भी संभव है।

टक स्टिच  के प्रभाव:

टक स्टिच  के प्रभाव नीचे दिए गए हैं:

1- टक स्टिच वाला कपड़ा निट स्टिच की तुलना में मोटा होता है क्योंकि टकिंग की  जगहों पर स्टीट्चेस  में सूत जमा हो जाता है।

2 - टक स्टिच वाली संरचना निट स्टिच  की तुलना में चौड़ी होती है।

3 - लूप के आकार का स्टिच  पर व्यापक आधार होता है।

4 - टक स्टिच संरचना कम एक्स्टेंसिबल हो जाती है क्योंकि प्रत्येक टक स्टिच पर लूप की लंबाई कम हो जाती है।

5 - टक स्टिच की मोटी प्रकृति के कारण टक स्टिच  हुए कपड़े जीएसएम में निट स्टिच फैब्रिक की तुलना में भारी होते हैं।

6 - टक स्टिच  हुआ कपड़ा निट स्टिच  हुए कपड़े की तुलना में अधिक खुला और झरझरा होता है।

7 - रंगीन धागे का उपयोग करके फैंसी प्रभाव प्राप्त करने के लिए टक स्टिच  का भी उपयोग किया जाता है।

मिस या फ्लोट स्टिच :

फ्लोट स्टिच केवल तब होता है जब सूत को सूई के सामने पेश किया जाता है लेकिन इसे सुई के हुक द्वारा नहीं लिया जाता है। यहां जो सूत दिया जाता है उसे प्राप्त करने के लिए सुई ऊपर की ओर सक्रिय नहीं होती है। इसलिए यह पुराने लूप को हुक में बनाए रखेगा। कपडे के पीछे लम्बे यार्न फ्लोट  वांछनीय नहीं होते  है ये लम्बे फ्लोट  स्नैगिंग की समस्या का कारण बनता है।

मिस या फ्लोट स्टिच का प्रभाव:

इसका उपयोग तब किया जाता है जब एक अवांछित रंगीन धागे को इस्तेमाल की जा रही कपड़े की सतह से पूरी तरह छुपाया जाता है। अनचाहे रंग का धागा टकने के बजाय पीछे की तरफ तैरता है। तैरने से एक समान बनावट प्राप्त होती है और धागे को बचाया जा सकता है। फ्लोट स्टिच के मुख्य प्रभाव नीचे दिए गए हैं।

1 - फ्लोट स्टिच टक स्टिच किये हुए कपड़े की तुलना में कपड़े को पतला बनाता है।

2 - फ्लोट स्टिच में कोई सूत जमा नहीं होता है।

3 - यह कपड़े को संकरा बनाता है क्योंकि कोई लूप कॉन्फ़िगरेशन नहीं है।

4 - पूरी संरचना को अधिकतम चौड़ाई तक खींचा जाता है।

5 - फ्लोट स्टिच्ड फैब्रिक निट स्टिच्ड या टक स्टिचेड  फैब्रिक की तुलना में कम एक्स्टेंसिबल होता  है।

6 - निर्माण में कम से कम यार्न का इस्तेमाल होने से जीएसएम में कपड़ा हल्का हो जाता है।

7 - अन्य बुने हुए कपड़ों की तुलना में फ्लोट स्टिचेड कपड़े कम कठोर हो जाते हैं।

Friday, June 11, 2021

कपड़ा की टेंसाइल स्ट्रेंथ का परीक्षण ( Fabric tensile strength test )

 कपड़ा की  टेंसाइल स्ट्रेंथ का  परीक्षण:

कपड़े की टेंसाइल स्ट्रेंथ:

जब कपड़े पर खिंचाव बल (भार) लगाया जाता है, तो वह लम्बा होने लगता है। जैसे-जैसे खिंचाव बल (भार) धीरे-धीरे बढ़ता है, कपडे की लम्बाई  भी बढ़ती  जाती  है। जब खिंचाव बल की मात्रा एक निश्चित बिंदु तक पहुँच जाती है, तो कपड़ा टूटने लगता है। अब हम कह सकते हैं कि फैब्रिक की टेन्साइल स्ट्रेंथ स्ट्रेचिंग फोर्स (लोड) की वह  मात्रा है जिस पर स्ट्रेचिंग बल लगने की स्थिति में  फैब्रिक टूट जाता है। इसे न्यूटन, पाउंड या किलोग्राम-बल में मापा जाता है। यह यार्न की ताकत, सामग्री के प्रकार या कपड़े के प्रति वर्ग इंच में धागों की  संख्या पर निर्भर करता है। कपड़े की टेंसाइल स्ट्रेंथ  ताना और बाने की दिशा में अलग-अलग निकाली  जाती है।

सिंथेटिक कपड़ों में प्राकृतिक कपड़ों की तुलना में बेहतर टेंसाइल स्ट्रेंथ होती है।

महीन और लंबे स्टेपल रेशों से बने कपड़े में मोटे और छोटे रेशों की तुलना में अधिक टेंसाइल स्ट्रेंथ होती है।

यदि दो कपड़ों की ताना और बाने की काउंट समान है, तो प्रति वर्ग इंच में अधिक धागे वाले कपड़े में उच्च टेंसाइल स्ट्रेंथ होती है।

कपड़ा की टेंसाइल स्ट्रेंथ का परीक्षण:

फैब्रिक टेन्साइल स्ट्रेंथ के परीक्षण के लिए दो प्रकार की विधियों का उपयोग किया जाता है:

1 - स्ट्रिप टेस्ट

2 - ग्रैब टेस्ट 

स्ट्रिप टेस्ट:

इस परीक्षण में, नमूने की पूरी चौड़ाई को पकड़ने वाले जबड़ों के बीच पकड़कर कपडे को लम्बाई में खींचा जाता है। संपूर्ण परीक्षण नीचे दिए गए चरणों में पूरा किया जाता है:

प्रयुक्त उपकरण:

1- फैब्रिक टेंसाइल स्ट्रेंथ टेस्टर 

2- फैब्रिक स्वैच

3- कैंची

४ - मार्किंग पेन

5- आवर्धक काँच

6- अंकन टेम्पलेट

7- सुई

नमूना तैयार करना:

कपड़े की टेंसाइल स्ट्रेंथ  ताना और बाने की दिशा में अलग-अलग निर्धारित की जाती है।

सबसे पहले मैग्नीफाइंग ग्लास की मदद से कपड़े के ताना और बाने की दिशा को ध्यान से पहचाना जाता है।

अब, परीक्षण मानक के अनुसार ताना और बाने दिशाओं से कई नमूने तैयार किए जाते हैं। प्रत्येक दिशा से 5 नमूने तैयार किए जाते हैं।

कई परीक्षण मानक प्रक्रियाओं में, परीक्षण नमूने की लंबाई 200 मिमी या 8 इंच रखी जाती है और नमूने की चौड़ाई 50 मिमी या 2 इंच रखी जाती है।

ग्रिपिंग मार्जिन को टेस्टिंग इंस्ट्रूमेंट के ग्रिपिंग जॉ के अनुसार लंबाई की दिशा में भी लिया जाता है।

नमूनों के ताना या बाने के धागों को सुई की मदद से चौड़ाई के किनारों के किनारों के धागों को हटाकर संरेखित किया जाता है। आप नीचे दी गई तस्वीरों को देख सकते हैं:



परीक्षण विधि:

सबसे पहले, ताना के  नमूनों का एक-एक करके परीक्षण किया जाता है। नमूना को स्थिर और चल पकड़ने वाले जबड़े के बीच सावधानी से कस दिया जाता है। कृपया नीचे दी गई तस्वीर देखें:

दोनों पकड़ने वाले जबड़ों के बीच नमूना लंबाई 200 मिमी सटीक रूप से  रखी जाती  है।

अब, लोड सेल की रीडिंग आराम की स्थिति में देखी जाती है।

बिजली की आपूर्ति अब चालू की जाती है।

मूवेबल जबड़े  यात्रा करना शुरू करते हैं और वे नमूने पर एक खिंचाव बल लगाते हैं।

जब खिंचाव बल एक निश्चित सीमा तक पहुँच जाता है, तो नमूना टूट जाता है।

ब्रेकिंग लोड स्वचालित रूप से लोड सेल में दर्ज हो जाता है।

तोड़ने वाला बल अब नोट किया गया है।

अंतिम रीडिंग और प्रारंभिक रीडिंग  के बीच के अंतर की गणना की जाती है।

यह अंतर कपड़े की टेंसाइल स्ट्रेंथ होती  है।

ग्रैब टेस्ट:

इस विधि में नमूने का आकार 6” x 4” रखा जाता है। नमूना की चौड़ाई के बीच  का केवल एक इंच भाग ही  स्थिर और चलने योग्य पकड़ने वाले जबड़े से पकड़ा जाता है। खिंचाव बल केवल एक इंच चौड़ी पट्टी पर लगाया जाता है। नमूना चौड़ाई के दोनों किनारों पर 1.5 ” का मार्जिन नमूना के ऊपर और नीचे की तरफ अनक्लेम्प्ड  रखा जाता है। दोनों ग्रिपिंग जॉ के बीच की दूरी 6" रखी जाती है  है। बाकी परीक्षण विधि स्ट्रिप टेस्ट के समान हो जाती है। आप नीचे दी गई तस्वीर से क्लैम्पिंग विधि को समझ सकते हैं:


Thursday, June 10, 2021

Fabric tensile strength test

 

Fabric tensile strength test:

 

Tensile strength of fabric:

 

When the stretching force (load) is applied to the fabric, it begins to elongate. As the stretching force (load) increases gradually, the elongation also increases. When the amount of stretching force reaches a certain point, the fabric begins to break. Now we can say that the tensile strength of the fabric is the amount of stretching force (load) at which the fabric begins to break when it comes under stretching conditions. It is measured in Newtons, pounds, or kilogram-force. It depends upon the yarn strength, material type or thread count per square inch of the fabric etc. The tensile strength of the fabric is determined separately in the warp and weft direction.

 

Synthetic fabrics have better tensile strength than natural fabrics.

 

The fabric made of fine and long-staple fibres poses higher tensile strength than coarse and short fibres.

 

If the warp and the weft count of two fabrics are same, then the fabric having more threads per square inch will give a higher tensile strength.

 

Fabric tensile strength test:

 

There are two types of methods used for testing of fabric tensile strength:

 

11 - Strip test

22 - Grab test

 

Strip test:


In this test, the full width of the specimen is gripped between gripping jaws and stretched. The whole test is completed in below steps:

 

Apparatus used:

 

11- Fabric tensile strength tester

22- Fabric swatch

33- Scissor

44- Marking pen

55- Magnifying glass

66- Marking template

77- Needle

 

Specimens preparation:

 

The fabric tensile strength is determined in warp and weft direction separately.

 

First of all, the warp and weft direction of the fabric is identified carefully with the help of magnifying glass.

 

Now, a number of specimens from warp and weft directions are prepared according to the testing standard. 5 specimens from each direction are prepared.

In many testing standard procedures, the length of the test specimen is kept 200 mm or 8 inches and the width of the specimen is kept 50 mm or 2 inches.

 

The gripping margin is also taken in the length direction according to the gripping jaws of the testing instrument.

The warp or weft threads of the specimens are aligned by removing the threads of edges of width sides with the help of a needle. You can see the below pictures:


Testing method:

First of all, the warp specimens are tested one by one. The specimen is tightened between fixed and movable gripping jaws carefully. please see the below picture:

 




The specimen length between both gripping jaws is kept 200 mm accurately.

 

Now, the reading of the load cell is observed in relaxed condition.

 

The power supply is switched on now.

 

The movable jaws begin to travel and they apply a stretching force upon the specimen.

 

When the stretching force reaches a certain limit, the specimen gets broken.

 

The breaking load is recorded automatically in the load cell.

 

The breaking force is noted now.

 

The difference between the last reading and initial reading is calculated.  

 

This difference is the tensile strength of the fabric.

Grab test: 


The specimen size is kept 6” x 4” in this method. Only one inch of the specimen width is gripped by fixed and movable gripping jaws. The stretching force gets applied upon only one-inch wide strip. 1.5” margin at both sides of the specimen width is kept unclamped at the top and bottom sides of the specimen. The distance between both gripping jaws is kept 6”. The rest of the testing method gets similar to the strip test. you can understand the clamping method by the below picture:


Wednesday, June 9, 2021

कपास के फाइबर की महीनता ( फाइननेस ) का मूल्यांकन ( Evaluation of cotton fibre fineness )

 कपास के  फाइबर की महीनता (  फाइननेस ) का मूल्यांकन:

कॉटन फाइबर की महीनता: 

 फाइबर की महीनता  हमें फाइबर के व्यास या फाइबर के क्रॉस सेक्शन के आयामों के बारे में बताती है। चूंकि कपास के रेशों में नियमित व्यास या क्रॉस-सेक्शनल आयाम नहीं होता है, इसलिए क्रॉस-सेक्शनल आयाम या व्यास को सटीक रूप से निर्धारित करना लगभग असंभव हो जाता है। फाइबर का प्रति इकाई बजन  मापा जाता है। "फाइबर की प्रति इकाई लंबाई के वजन या फाइबर के रैखिक घनत्व को फाइबर की महीनता  (  फाइननेस ) कहा जाता है"। फाइबर सूक्ष्मता माइक्रोग्राम/इंच की इकाई सामान्यतः प्रयोग की जाती है।                                                                 

कपास के रेशे की पतलेपन (  फाइननेस ) रेशे की एक बहुत ही महत्वपूर्ण विशेषता है। यह  कपास की किस्म से काते जाने वाले धागे की गुणवत्ता को सीधे प्रभावित करता है। यदि एक ही काउंट  के दो धागों को अलग-अलग रेशे की महीनता वाली दो कपास किस्मों का उपयोग करके काता जाता है, तो उल्लेखनीय अंतर उन धागों की ताकत, समरूपता और हेयरिनेस के बीच का होता है।

हम पैदा किये जाने  वाले सूत के गुणों के बीच इस अंतर के कारण को निम्नलिखित उदहारण से  समझ सकते हैं।

मान लीजिए कि 10 s काउंट  के एक सूत को मोटे रेशों से काता जाता है, तो सूत के अनुप्रस्थ काट वाले क्षेत्र में रेशों की संख्या आवश्यक रेशों की  संख्या  से कम हो जाती है। इस प्रकार यार्न  यार्न की ताकत काम हो जाती  है। यदि सूत के अनुप्रस्थ काट क्षेत्र के रेशों की संख्या आवश्यक रेशों की संख्या से अधिक होती  है, तो इन महीन तंतुओं का परिणाम सूत की शक्ति में सुधार के रूप में होता है।

मोटे रेशे भी असमानता के रूप में परिणत होते हैं। यह कैसे होता है? कपास के रेशे विविधता के भीतर एक से दूसरे की महीनता में भिन्न होते हैं। यहाँ महीन रेशों  की अधिक संख्या  बाले कॉटन से बना धागा मोटे रेशों  की कम संख्या के साथ बनाये गए सूत की तुलना में बेहतर समरूपता के रूप में परिणाम होने की संभावना हमेशा अधिक होती है।

कॉटन फाइबर की महीनता की गणना:

कॉटन फाइबर की महीनता का परीक्षण:

वायु प्रवाह पर आधारित काम करने वाले एक मिक्रोनेयर  उपकरण का उपयोग आमतौर पर कपास के रेशे की महीनता  की जांच के लिए किया जाता है। “यह उपकरण फाइबर के एक प्लग के माध्यम से हवा के प्रवाह के लिए पेश किए गए प्रतिरोध पर काम करता है। इसका मतलब यह है कि परीक्षण के लिए कपास के रेशों के प्लग से कितनी हवा गुजरती है। वायु प्रवाह का प्रतिरोध रेशों के विशिष्ट सतह क्षेत्र पर निर्भर करता है। रेशों का परिपक्वता अनुपात विशिष्ट सतह क्षेत्र को भी प्रभावित करता है। यदि कपास के रेशों के नमूने का परिपक्वता अनुपात अत्यधिक भिन्न होता है तो माइक्रोनेयर मीटर की रीडिंग को उच्च स्तर की सावधानी के साथ व्यवहार किया जाता है। 

माइक्रोनेयर मीटर में सैंपल से 3.24 ग्राम कपास की मात्रा ली जाती है। अब कपास की यह तौली हुई मात्रा अच्छी तरह से ओपन की जाती  है। यह अच्छी तरह से खुला कपास निश्चित आयामों के बेलनाकार कंटेनर में संकुचित होता है। संपीड़ित हवा को एक निश्चित दबाव पर नमूने के बीच से गुजरा  जाता है और हवा के प्रवाह की मात्रा-दर को रोटोमीटर प्रकार के वायु प्रवाहमापी द्वारा मापा जाता है। माइक्रोनेयर परीक्षण के लिए नमूना अच्छी तरह से साफ किया जाना चाहिए, और अच्छी तरह से मिलाया जाना चाहिए (हाथ से फुलाना और खोलने की विधि द्वारा)। कम मीटर रीडिंग इंगित करती है कि फाइबर ठीक है। ग्रेडिंग निम्नानुसार की जाती है:

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