Saturday, October 23, 2021

कपास कताई प्रक्रिया चार्ट और विभिन्न कताई प्रक्रियाएं

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COTTON SPINNING PROCESS CHART AND VARIOUS SPINNING PROCESSES

 कपास कताई प्रक्रिया चार्ट और विभिन्न कताई प्रक्रियाएं:


 कपास कताई प्रक्रिया चार्ट:


 सूती धागे की कताई:


सूती धागे का निर्माण आज दो विधियों का उपयोग करके किया जाता है।

1 - रिंग फ्रेम स्पिनिंग 

2 - ओपन-एंड स्पिनिंग


सूती धागे की कताई में कुछ प्रक्रियाएं रिंग फ्रेम स्पिनिंग और ओपन-एंड स्पिनिंग दोनों के लिए सामान होती  हैं। कुछ प्रक्रियाओं का उपयोग केवल रिंग फ्रेम कताई में किया जाता है। सूती धागे की कताई में उपयोग की जाने वाली विभिन्न प्रक्रिया नीचे दी गई है:

ए - मिक्सिंग एंड ब्लो रूम:

कॉटन लिंट मशीन में फीड होता है। ये कॉटन लिंट इस मशीन द्वारा  अच्छी तरह से मिश्रित किये जाते  हैं, लिंट के आकार को न्यूनतम संभव आकार तक कम किया जाता है, साफ किया जाता है और इस  प्रक्रिया के बाद लैप का निर्माण होता है।

बी - कार्डिंग:

मशीन में लैप को फीड किया जाता है और इस प्रक्रिया में फाइबर से फाइबर पृथक्करण प्राप्त होता है। इस प्रक्रिया में अंतिम सफाई भी हासिल की जाती है। कार्डिंग प्रोसेस के अंत में स्लाइवर का निर्माण होता  है।

इन दो प्रक्रियाओं के बाद, स्लिवर को ओपन-एंड स्पिनिंग मशीन जैसे रोटर स्पिनिंग या एयर जेट स्पिनिंग में भेजा जाता है अन्यथा स्लिवर निम्नलिखित प्रक्रियाओं से गुजरता है:

सी - ड्रा फ्रेम (ड्राइंग):

कार्डिंग से प्राप्त कई स्लिवर मशीन में एक साथ फीड किये जाते हैं और इस प्रोसेस के अंत में  केवल एक स्लाइवर का निर्माण होता  है। इस प्रक्रिया में स्लाइवर  की समता प्राप्त होती है।

डी - कॉम्बिंग:

ड्रॉ फ्रेम से प्राप्त स्लाइवर को  कॉम्बिंग मशीन में फीड किया  जाता है। इस प्रक्रिया में, कपास से छोटे रेशे (12 मिमी तक लंबे रेशे) बहार निकल जाते हैं। इस प्रक्रिया द्वारा अधिकतम फाइबर स्ट्रेटनिंग भी प्राप्त की जाती है। प्रसंस्करण के बाद फिर से स्लाइवर का  उत्पादन होता है।

ई - स्पीड फ्रेम या रोविंग फ्रेम (सिम्पलेक्स):

कॉम्बिंग  से प्राप्त स्लाइवर को  इस मशीन में फीड किया जाता है। स्लाइवर  को उसकी मूल लंबाई से  कई गुना अधिक लम्बाई तक  खींचा जाता है। प्रसंस्करण के बाद रोविंग का निर्माण होता  है।

च - रिंग फ्रेम:

सिम्प्लेक्स से प्राप्त रोविंग को  रिंग फ्रेम में फीड किया जाता  है। इस प्रोसेस में रोविंग को अपनी मूल  लंबाई से कई गुना लम्बाई तक  खींचा जाता  है। रिंग ट्रैवलर की मदद से यार्न में आवश्यक डिग्री का ट्विस्ट भी डाला जाता है। अंत में, इस मशीन पर यार्न का निर्माण होता है। यार्न रिंग बॉबिन पर लपेटा जाता  है।

विभिन्न प्रकार के कपास और कपास की विभिन्न किस्में

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VARIOUS TYPES OF COTTON AND COTTON VARIETIES

 विभिन्न प्रकार के कपास और कपास की विभिन्न किस्में

 कपास के मूल प्रकार:

कपड़ों के लिए कॉटन फाइबर सबसे उपयुक्त फाइबर होता  है। यह दुनिया भर में व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है। कपड़ों से शुरू होकर, यह बड़े पैमाने पर टेबल लिनन, किचन लिनन, पर्दे, अपहोल्स्ट्री, रजाई, कम्फर्ट, कॉटन कंबल, शीट-सेट आदि में उपयोग किया जाता है। इसकी विशेषताएं इसे सभी फाइबर के बीच सबसे लोकप्रिय और उपयोगी बनाती हैं। इसकी उपलब्धता और आसान बायोडिग्रेडेबल चरित्र इसे सभी टेक्सटाइल फाइबर  का राजा बनाते हैं। दुनिया के नब्बे से अधिक देशों में इसकी खेती की जाती है। कपास फाइबर की गुणवत्ता उन क्षेत्रों के अनुसार भिन्न होती है जहां इसे उगाया जाता है। खेत की मिट्टी और जलवायु परिस्थितियाँ इसकी विशेषताओं के विकास में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। दुनिया भर में व्यावसायिक रूप से उगाए जाने वाले पाँच "देशी प्रकार के कपास" हैं। ये नीचे दिए जा रहे हैं:

      • मिस्र का कपास(एगिप्सियन कॉटन 


      • सागर द्वीप कपास (सी आईसलैंड कॉटन )


      • अमेरिकन पिमा कॉटन


      • एशियाई कपास(एशियाटिक कॉटन)


      • अमेरिकी अपलैंड कपास।


मिस्र का कपास(एगिप्सियन कॉटन) :


इस प्रकार का कपास मिस्र और इस देश के आसपास के क्षेत्रों में उगाया जाता है। यह सूती रेशा हल्के भूरे रंग का होता है। इस कपास में बहुत अच्छी चमक होती है । इसकी बहुत लंबी फाइबर लंबाई (मुख्य लंबाई) होती है और इस कपास की महीनता बहुत अच्छी (कम माइक्रोनेयर वैल्यू) होती है। इस प्रकार के कपास फाइबर में फाइबर की अच्छी ताकत होती है। इस कपास से काते गए यार्न में अच्छी ताकत, चमक, बालों का निम्नतम स्तर होता है। इस कपास का उपयोग करके बेहतरीन सूत और कपड़े का उत्पादन किया जा सकता है।

गीज़ा 45:

गीज़ा 45 पौधों की खेती नील डेल्टा के पूर्व में एक बहुत छोटे क्षेत्र में की जाती है, और वे मिस्र के कुल वार्षिक कपास उत्पादन का केवल 0.4% प्रतिनिधित्व करते हैं। गीज़ा 45 कपास उत्पादन के रेशों में एक असाधारण स्टेपल लंबाई होती है जो आसानी से 36 मिमी और 88.5% की एक अद्वितीय एकरूपता सूचकांक को पार कर जाती है। इसके अलावा जो बात इस कपास को सभी अतिरिक्त-लंबे स्टेपल कपास के बीच असाधारण बनाती है, वह है इसके रेशों की औसतन २.९५ माइक्रोनेयर।

इसकी फाइंनेस  के बावजूद, गीज़ा 45 फाइबर की ताकत उच्च होती  है। यह संयोजन दुनिया में सबसे कीमती शर्ट के लिए असाधारण रूप से नरम और रेशमी स्पर्श के साथ बेहद महीन, टिकाऊ कपड़े सुनिश्चित करता है।

मिस्र के कपास की कुछ किस्में नीचे तालिका में दी गई हैं। इस तालिका में गीज़ा के लिए G का प्रयोग किया गया है।

सागर द्वीप कपास(सी आईसलैंड कॉटन ):

इस तरह के कॉटन में सिल्की लुक होता है। इसकी  चमक बहुत अच्छी होती है। सी आईलैंड कॉटन का उपयोग करके यार्न की बेहतरीन काउंट  का उत्पादन किया जा सकता है। अपने सिल्की लुक के कारण इसे सिल्क के साथ भी ब्लेंड किया जा सकता है। इसका लंबा स्टेपल फाइबर इसे बेहतरीन कॉटन काउंट यार्न में इस्तेमाल करने के लिए उपयुक्त बनाता है। इस प्रकार की कपास अन्य प्रकार की कपास की तुलना में अधिक महंगी होती है। इस कॉटन से फाइन शर्टिंग फैब्रिक बनाए जाते हैं।

पिमा कपास(अमेरिकन पिमा कॉटन):

पीमा कपास के रेशों में अतिरिक्त लंबी स्टेपल लंबाई होती है। "पीमा कपास की गुणवत्ता मिस्र के कपास के बराबर होती है"। पीमा कपास की ताकत, कोमलता, स्थायित्व और अवशोषण इसे कपड़ों, तौलिये और चादरों आदि के लिए सबसे लोकप्रिय और बेहतरीन कपास में से एक बनाता है।

पिमा कपास को मुख्य रूप से फाइबर की विशेषताओं के अनुसार तीन समूहों में वर्गीकृत किया जा सकता है जैसे ताकत, प्रधान लंबाई, सुंदरता, परिपक्वता अनुपात, एकरूपता सूचकांक आदि।

फाइटोजेन: निम्नलिखित किस्में इस समूह के अंतर्गत आती हैं

पीमा कपास की किस्में:

PHY811 RF, PHY 888 RF, PHY 805 RF, PHY 841 RF, PHY 881।

डेल्टापाइन:

इस समूह के अंतर्गत निम्नलिखित किस्में आती हैं

पीमा कपास की किस्में: DP 348 RF PIMA, DP 358 RF PIMA

हजीरा : इस वर्ग के अंतर्गत निम्नलिखित किस्में आती हैं

पीमा कपास की किस्में: HA1432

एशियाई कपास(एशियाटिक कॉटन):

"इस प्रकार का कपास भारतीय उपमहाद्वीप, चीन और निकट पूर्व में उगाया जाता है"। चूंकि इस कपास में मोटे और कठोर रेशे होते हैं, इसलिए यह महीन सूती कपड़े (वस्त्र) बनाने के लिए उपयुक्त नहीं है। "इसका उपयोग सूती कंबल, फिल्टर, स्नान चटाई, पर्दे टेबल लिनन, रसोई लिनन, मोटे कपड़े, पैडिंग सामग्री और घरेलू सामान आदि बनाने के लिए किया जाता है"

अमेरिकी अपलैंड कपास:

कपास का एक अन्य आमतौर पर इस्तेमाल किया जाने वाला प्रकार अमेरिकी अपलैंड कपास है। यह कम खर्चीला और बुनियादी गुणवत्ता का है, और इसका उपयोग कई प्रकार के कपड़े बनाने के लिए भी किया जाता है। कपास की बहुमुखी प्रतिभा इसे निर्माण के लिए प्रयोग करने योग्य बनाती है

कपास की किस्में (वेरायटीज ऑफ़ कॉटन) :

"व्यापार में संदर्भित विभिन्न प्रकार के कपास को कपास की एक किस्म के रूप में जाना जाता है"। कपास की एक किस्म भी इसकी विशेषताओं को संदर्भित करती है जैसे कि फाइबर की लंबाई, फाइबर की सुंदरता, फाइबर की ताकत, रंग ग्रेड और अन्य जिन्हें मापा जा सकता है। ये विशेषताएँ इसके मूल्य और उपयोग के बारे में निर्णय लेने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। कपास की किस्मों को पर्यावरण और मिट्टी की गुणवत्ता के संबंध में विशिष्ट बढ़ते क्षेत्रों के अनुरूप विकसित किया जाता है। "कपास की विभिन्न किस्मों के विकास का मुख्य उद्देश्य उपज क्षमता (कपास की मात्रा प्रति एकड़) को अधिकतम करना और कपास की विशेषताओं को इष्टतम स्तर तक सुधारना है।"

विश्व में व्यावसायिक रूप से उगाई जाने वाली मुख्य किस्में नीचे दी गई हैं:

अमेरिकी अपलैंड कपास की किस्में:


अपलैंड कपास की सामान्य किस्में हैं:

· डेल्टा।

· सादा।

ईस्टर्न।

अकला

भारतीय कपास की विभिन्न किस्में:

बंगाल देसी, जे-34, एस/जी या डी/आर, एलआरए, एच-4, एमईसीएच-1, शंकर-6, बनी, एमसीयू-5 (30-31-32-33-एमएम), डीसीएच-32,

कुछ भारतीय कपास किस्मों की सूची, उत्पादन प्रतिशत, अवधि लंबाई और उगाने वाले राज्यों की सूची नीचे दी गई है:

Thursday, October 21, 2021

यार्न काउंट, टेन्साइल स्ट्रेंथ (बंडल स्ट्रेंथ और यार्न सी.एस.पी. परीक्षण):

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YARN COUNT TESTING AND YARN TENSILE STRENGTH TESTING, CSP OF YARN

 यार्न काउंट, टेन्साइल स्ट्रेंथ (बंडल स्ट्रेंथ और यार्न सी.एस.पी. परीक्षण):



यार्न काउंट का  परीक्षण:


यार्न काउंट का परीक्षण नीचे दिए गए  चरणों में पूरा होता है:


सूत की लक्षी या हेंक  तैयार करना:


यार्न पैकेज को रैप रील के  कोन होल्डर पर रखा जाता है। अब सूत का सिरा एक सूत गाइड से होकर गुजरता है। यह सिरा रैप रील में लगे एक स्क्रू से बाँधा  जाता है। कृपया नीचे चित्र में देखें:
इस रैप रील में एक काउंटर मीटर लगाया जाता  है। यह काउंटर मीटर लक्षी में यार्न के रैप्स की संख्या को गिनने में मदद करता है। आज की रैप रील फुल लेंथ स्टॉप मोशन से लैस होती है। जब यार्न के रैप्स की संख्या, काउंटर मीटर में पहले से ही फीड  रैप्स  की संख्या तक पहुंच जाती है, तो स्टॉप मोशन तुरंत सक्रिय हो जाता है और रैप रील को रोक देता है।

रैप रील का व्यास 1.5 गज के बराबर होता है। गणना परीक्षण के लिए 120 गज यार्न  की लंबाई की लक्षी की आवश्यकता होती है। इस प्रकार काउंटर मीटर में रैप्स की संख्या तय हो जाती है। यानी की ८० रेप्स .
रैप रील एक मोटर द्वारा संचालित होती है। जब लक्षी में  रेप्स की संख्या  फीड नंबर तक पहुंच जाती है, तो स्टॉप मोशन रेप रील को  तुरंत रोक देता है। अब  प्रारंभिक छोर और अंतिम छोर मजबूती से एक  दूसरे के साथ में गांठ द्वारा जोड़ दिए जाते  हैं और लक्षी को रेप रील से सावधानी पूर्वक बाहर निकल लेते हैं।


ली या लक्षी का वजन:


अब सूत की लक्षी  को इलेक्ट्रॉनिक तौल पैमाने में तौला जाता है। तौलने से पहले ये सुनिश्चित किया जाता है  कि तौल पैमाने में कोई जीरो  त्रुटि तो नहीं है। यदि कोई त्रुटि है, तो कृपया ली को तोलने से पहले तोलने का पैमाना रीसेट करें। कृपया नीचे चित्र देखें:


यार्न काउंट की गणना:

 यार्न काउंट                             = 2/ 14.76 एस


यार्न की तन्यता  ताकत ( टेंसाइल स्ट्रेंथ):

यह यार्न का सबसे महत्वपूर्ण पैरामीटर होता  है। यार्न की तन्यता ताकत यार्न को तोड़ने के लिए आवश्यक बल है। यार्न की तन्यता ताकत यार्न की एक बहुत ही महत्वपूर्ण गुण होती  है। यह सीधे बुनाई और दूसरी प्रक्रिया के दौरान यार्न के प्रदर्शन को प्रभावित करता है। चूंकि बुनाई की विभिन्न प्रक्रियाओं के दौरान यार्न मध्यम तनाव से गुजरता  है और यार्न पर झटका भी लगता   है,  इस तनाव और झटके को बर्दास्त करने के लिए यार्न में पर्याप्त ताकत होनी चाहिए। यार्न की ताकत का परीक्षण करने के लिए दो तरीकों का इस्तेमाल किया जाता है:


· बंडल ताकत


· सिंगल एंड स्ट्रेंथ


बंडल ताकत:

इस विधि का प्रयोग केवल एक ही काउंट के दो सूतो की टेंसाइल स्ट्रेंथ की तुलना करने  में ही किया जाता है। बंडल की ताकत यार्न की ताकत का सही मूल्य नहीं देती है लेकिन यह एक ही काउंट  के दो यार्न की तुलना करने में मदद करती है। अगर हमें दो समान धागों के बीच सबसे अच्छा एक सूत चुनना है, तो बंडल की ताकत बहुत उपयोगी है।
120 गज (1.5 गज के 80 रैप्स वाले) का एक लक्षी  या ली तैयार किया जाता है। इसे वर्टिकल ली स्ट्रेंथ टेस्टर की मदद से तोड़ा जाता है और ब्रेकिंग फोर्स (टेन्साइल स्ट्रेंथ) को पाउंड, किलोग्राम या न्यूटन में दर्ज किया जाता है। अब यार्न के काउंट स्ट्रेंथ उत्पाद की गणना निम्नानुसार की जाती है:


तन्य शक्ति परीक्षक पर ली  को लोड करना:

यार्न की तैयार ली को तन्य शक्ति परीक्षक पर लोड किया जाता है जैसा कि नीचे दिए गए चित्र में दिखाया गया है:


आपको हमेशा लोड सेल रीडिंग की जांच करनी चाहिए। लोड सेल की प्रारंभिक रीडिंग शून्य होनी चाहिए। यदि आपको प्रारंभिक रीडिंग  में कोई त्रुटि दिखाई देती है, तो कृपया लोड सेल के रीडिंग  को रीसेट करें।

ली या लक्षी  का टूटना:


अब मशीन को चालू करने के लिए हरे रंग का पुश बटन दबाया जाता है। जैसे-जैसे लक्षी के ऊपर भार धीरे-धीरे बढ़ता है, भार टूटने के बिंदु तक पहुँचने पर ली टूट जाती है। अब लोड सेल की रीडिंग रिकॉर्ड की जाती है।


सी.एस.पी. कैलकुलेशन:


तन्य शक्ति                = १५९.८ किग्रा
                              = १५९.८ X २.२०४ एलबीएस
                              = 352.19 एलबीएस
सी.एस.पी.                = यार्न काउंट(Ne) x तन्यता ताकत (एलबीएस)
                               = 7.38 एक्स 352.19
सी.एस.पी.                 = २५९९.१६

 
अधिक सीएसपी वाला सूत, समान काउंट  में सूत के लिए कम सीएसपी वाले सूत से बेहतर होता है।

Saturday, October 16, 2021

कपास( कॉटन) फाइबर की फाइननेस का परीक्षण (वायु प्रवाह विधि)

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Cotton fibre fineness test by Shirley fineness tester

 कपास( कॉटन) फाइबर की फाइननेस  का परीक्षण (वायु प्रवाह विधि)

यार्न की विशेषताओं में फाइबर की  फाइननेस बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह काता जाने वाले यार्न की गुणवत्ता को सीधे प्रभावित करता है। तन्य शक्ति, धागे के हैरिनेस्स की  डिग्री, चमक, फील , और धागे की कोमलता फाइबर की  फाइननेस पर निर्भर करती है। रेशों का मूल्य भी रेशे की  फाइननेस के अनुसार निर्धारित होता है। यदि बल्क में मौजूद सभी रेशों का व्यास समान हो, तो रेशे की सूक्ष्मता आसानी से निर्धारित की जा सकती है। सूती रेशों के मामले में, विभिन्न तंतुओं के अलग-अलग व्यास होते हैं। रेशे का व्यास एक ही तंतु में भिन्न-भिन्न स्थानों पर भिन्न भी हो सकता है। यही कारण है कि हम रेशों के व्यास को ठीक-ठीक नहीं माप सकते।

फाइबर  फाइननेस:

फाइबर की प्रति यूनिट लंबाई के वजन को फाइबर की  फाइननेस कहा जाता है। आम तौर पर, इसे माइक्रोग्राम/इंच में मापा जाता है।

कपास के रेशों के बल्क में लाखों फाइबर मौजूद होते हैं। हम प्रत्येक फाइबर के प्रति इकाई लंबाई के वजन का निर्धारण नहीं कर सकते। यह कतई संभव नहीं है। बल्क में फाइबर की प्रति यूनिट लंबाई के औसत वजन को निर्धारित करने के लिए एक एयरफ्लो विधि का उपयोग किया जाता है।

फाइबर  फाइननेस परीक्षण की वायु प्रवाह विधि:

इस विधि को एक उदाहरण से समझा जा सकता है। मान लीजिए कि हम अलग-अलग रेशे की महीनता वाले दो रेशों को बराबर मात्रा में लेते हैं। हम उन्हें दो सिलेंडर में रखते हैं और उन्हें संपीड़ित करते हैं। अब हम दोनों नमूनों में से समान दाब पर वायु प्रवाहित करते हैं। यहाँ, हम देखते हैं कि महीन तंतुओं के माध्यम से वायु प्रवाह मोटे रेशों की तुलना में कम होता है। यह सब मोटे और महीन रेशों के कुल सतह क्षेत्रफल के अंतर के कारण होता है। महीन रेशों के मामले में, हवा को अधिक अवरोधों का सामना करना पड़ता है और इसलिए वायु प्रवाह दर कम हो जाती है।

अब, हम कह सकते हैं कि वायु प्रवाह दर और विशिष्ट सतह क्षेत्र एक दूसरे के व्युत्क्रमानुपाती होते हैं। यह विधि बहुत उपयोगी है और शीघ्र परिणाम देती है

शर्ले  फाइननेस परीक्षक द्वारा कपास फाइबर  फाइननेस परीक्षण:


उपकरण का इस्तेमाल किया:

1- शर्ले कपास फाइबर  फाइननेस परीक्षक

2- वजनी पैमाना

3- कपास के रेशे

नमूना तैयारी:

6 ग्राम प्लस या माइनस कॉटन का वजन सही ढंग से किया जाता है। यदि उपकरण के नए संस्करण का उपयोग किया जाता है तो नमूना वजन 5 ग्राम रखा जाता है। किसी भी उलझे हुए हिस्से को खत्म करने के लिए सैंपल को ठीक से फुलाया जाता है।

यदि शर्ले ट्रैश  विश्लेषक उपलब्ध हो जाता है, तो नमूना तौलने से पहले सामग्री को खोला जाता है, साफ किया जाता है और कचरा विश्लेषक की मदद से मिश्रित किया जाता है।

परीक्षण प्रक्रिया:

*सबसे पहले, नमूना बेलनाकार होल्डर A में पैक किया जाता है।

*अब नमूना छिद्रित प्लंजर P द्वारा स्थिर मात्रा में संकुचित होता है।

* इस स्तर पर प्रवाह नियंत्रण वाल्व V को बंद रखा जाता है।

*अब, एग्जॉस्ट पंप E की बिजली आपूर्ति चालू की जाती है। निकास पंप तुरंत हवा को चूसना शुरू कर देता है।

*वायु प्रवाह को प्रवाह नियंत्रण वाल्व V द्वारा नियंत्रित किया जाता है जब तक कि मैनोमीटर M इंगित नहीं करता है कि कपास के प्लग के अंत में पानी के 18 सेमी का दबाव अंतर मौजूद है।

*इस उपकरण के नए संस्करण को माइक्रोनेयर मूल्यों में कैलिब्रेटेड  पैमाने के साथ आपूर्ति की जाती है। फ्लो मीटर के शीर्ष की रीडिंग अब दर्ज की जाती है।

*यदि नए संस्करण का उपयोग किया जाता है, तो नमूने का वजन 5 ग्राम रखा जाता है।

*पुराने नमूने को हटाने और बेलनाकार होल्डर में नए नमूने को दोबारा पैक करने के बाद दोबारा अवलोकन किया जाता है।

*चार अलग-अलग नमूनों का परीक्षण किया जाता है और माध्य मान की गणना की जाती है। इस प्रकार अंतिम माइक्रोनेयर मूल्य निर्धारित किया जाता है

कपास और फ्लेक्स के रेशे मिश्रित सूत और प्रत्येक घटक का अनुमानित मात्रात्मक विश्लेषण: (

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Cotton and Flax fibres blended yarn and estimated quantitative analysis of each component

 कपास और फ्लेक्स  के रेशे मिश्रित सूत और प्रत्येक घटक का अनुमानित मात्रात्मक विश्लेषण:

जब कताई के दौरान फ्लेक्स  (लिनन) के रेशों को कपास के रेशों के साथ मिश्रित किया जाता है, तो रेशे के प्रकारों का पता लगाना बहुत मुश्किल हो जाता है। जब एक तकनीशियन सूत को देखता है, तो वह पाता है कि सूत की सतह पर छोटे-छोटे अनियमित महीन स्लब्स   दिखाई दे रहे हैं। और वह  ये  भी देखता है कि इस धागे में कपास भी मौजूद है। अब उनके सामने कड़ी चुनौती नजर आ आती है. वह उन रेशों के बारे में सोचता है जो उस सूत में मौजूद छोटे अनियमित स्लब की तरह एक स्लब प्रभाव पैदा करते हैं। वह पिछले अनुभव के अनुसार एक निष्कर्ष निकालता है कि कपास के रेशों को फ्लेक्स (लिनन ) या हेम्प  के रेशों के साथ मिश्रित किया जाता है तो यार्न के अंदर अनियमित स्लब्स दिखाई देते हैं अब वह नीचे के रूप में परीक्षण प्रक्रिया शुरू करता है:

फिजिकल  परीक्षण:

सबसे पहले, एनिमल फाइबर, वनस्पति फाइबर, री-जनरेटेड  फाइबर और थर्मोप्लास्टिक फाइबर जैसे फाइबर की प्रकृति के प्रकार का पता लगाने के लिए फिजिकल  परीक्षण किया जाता है।

जैसे ही तकनीशियन एक ज्वलनशील परीक्षण करता है, वह पाता है कि सूत कागज की तरह जल रहा है, उसे इस बात की पुष्टि हो जाती है कि सूत सेल्यूलोसिक फाइबर से बना है।



अब, दो संभावनाएं हो सकती हैं:

1- पौधे आधारित फाइबर।

2- री-जनरेटेड सेल्युलोसिक फाइबर

अब, वह फिर से यार्न को कमरे के तापमान पर 59.5% सल्फ्यूरिक एसिड (w/w) में 20-30 मिनट के लिए डुबो देता है। यदि सूत नहीं घुलता है, तो उसे इस बात की पुष्टि हो जाती है कि सूत में केवल पौधे आधारित रेशे हैं।

फ्लेक्स  के साथ कपास या हेम्प  के साथ कपास का मिश्रण हो सकता है।

हम कॉटन और फ्लैक्स ब्लेंडेड यार्न के परीक्षण पर चर्चा कर रहे हैं।

फ्लेक्स  और कपास का पता लगाना:

पूरी परीक्षण प्रक्रिया नीचे दिए गए चरणों में पूरी होती है:

1 - यार्न को कम से कम 8 घंटे के लिए मानक वायुमंडलीय परिस्थितियों में रखा जाता है।

2 - सूत की एक छोटी मात्रा को एक उपयुक्त तौल पैमाने की सहायता से सही-सही तौला जाता है।

3 - सैंपल थ्रेड्स को एल्कोहलिक फ्यूकसिन सॉल्यूशन (100 सीसी अल्कोहल में 1 ग्राम फ्यूसीन) में डुबो कर रंगा जाता है।

4 - अब, नमूने को तब तक साफ पानी से धोया जाता है जब तक कि रंग उतरना बंद न हो जाए।

5 - धोया हुआ नमूना अमोनिया में लगभग तीन मिनट तक डुबाया जाता  है।

6 - लिनन के धागों का रंग गुलाबी हो जाता है, जबकि सूती धागों का रंग फीका पड़ जाता है।

फ्लेक्स (लिनेन) और कॉटन  फाइबर का मात्रात्मक अनुमान:

* नमूनों में लिनन और कपास के मात्रात्मक आकलन के प्रयोजनों के लिए, पहले रंग से मुक्त और डाइल्यूटेड  हाइड्रोक्लोरिक एसिड या आसुत जल में उपयुक्त उबालने के बाद, पूरी तरह से धोने के बाद, कंसन्ट्रेटेड सल्फुरिक एसिड  में डेढ़ या दो मिनट के लिए डुबोया जाता है। 

* अब, नमूने को अच्छी तरह से धोया जाता है, उंगलियों के बीच रगड़ा जाता है और इसे डाइल्यूटेड  अमोनिया या सोडियम कार्बोनेट के घोल में डुबो कर निष्प्रभावी ( न्यूट्रल ) कर दिया जाता है।


* पानी में फिर से धोने के बाद, धागों को दो ब्लॉटिंग पेपर के बीच दबा दिया जाता है। अब इस प्रकार धागे सूख जाते  हैं।


अवलोकन और गणना:

अब धागों के  पूरी तरह से सूखने के बाद अवलोकन किया जाता  है।

यह पाया जाता है कि लिनन के रेशों ने अपनी संरचना को बरकरार रखा है।

कपास के रेशे जिलेटिनस अवस्था से गुजरने के बाद घुल जाते हैं जिसमें वे टिंडर की तरह फट जाते हैं।

मान लीजिए

नमूना वजन =  A ग्राम

लिनन फाइबर वजन =  B ग्राम

कपास के रेशों का भार = (A - B) ग्राम

लिनन फाइबर(%) = (B/A) * १००

कपास के रेशे (%) = {(A-B)/A}*100


Wednesday, October 13, 2021

कपङे का विश्लेषण ( वोवन फैब्रिक एनालिसिस) Woven fabric analysis

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FABRIC ANALYSIS

कपङे का  विश्लेषण ( वोवन फैब्रिक एनालिसिस)


"कपड़ा विश्लेषण एक कपड़े का निर्माण शुरू करने के लिए आवश्यक सभी सूचनाओं के बारे में जानने की एक प्रक्रिया है"। एक बुनकर को हमेशा व्यवस्थित तरीके से बुने जाने वाले कपड़े का विश्लेषण करने की आवश्यकता होती है। बुनकर को कपड़े के सभी मापदंडों का सटीक निर्धारण करना चाहिए। "कपड़े के विश्लेषण के दौरान किसी भी लापरवाही से बुनकर को भारी से बहुत भारी नुकसान हो सकता है"। कपड़ा उत्पादन शुरू करने से पहले कपड़े का उचित और सटीक विश्लेषण किया जाना चाहिए। फैब्रिक विश्लेषण की सही प्रक्रिया नीचे दी गई है:


चरण 1 - ताना और बाने की  दिशाओं की पहचान:

 
कपड़े का ताना और बाना की दिशा किसी भी बुनकर के लिए सबसे महत्वपूर्ण कारक होती  हैं। कपड़े में ताना और बाने की दिशा सावधानी से पहचानी जाती है। ताना और बाने की दिशा निम्नलिखित विधि द्वारा पहचानी जाती है:


कपड़े में रीड के डेंट वायर  का निशान:


बुने हुए कपड़े में ताना और बाने की दिशा की पहचान करने का यह सबसे अच्छा तरीका है। कपड़े एक उच्य प्रकाश स्रोत के अंदर  देखा  जाता है। ग्रे कपड़े में रीड  का निशान नग्न आंखों से स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। "डेंट वायर  का निशान हवा का स्थान है जो कपड़े में रीड के डेंट वायर  के कारण बनता है"। यह हवाई क्षेत्र कपड़े में दूरी के नियमित अंतराल पर दिखाई देता है (कपड़े में प्रयुक्त डेंटिंग क्रम के अनुसार)। ये डेंट वायर  के निशान कपड़े में ताना दिशा में चलते हैं।



 इस प्रकार बुनकर बुने जाने वाले कपड़े में ताना दिशा तय करता है। कपड़े की दूसरी दिशा बाने की दिशा होती  है।
यदि किसी बुनकर को रंगे हुए कपड़े का नमूना मिलता है, तो ताना और बाने की दिशा की पहचान के दौरान कुछ कठिनाइयाँ आती हैं। कपड़े में ताना और बाने का घनत्व अधिक होने पर कठिनाइयाँ और अधिक बढ़ जाती हैं। इस स्थिति में रीड के डेंट वायर  के निशान स्पष्ट और लगातार दिखाई नहीं देते हैं। अब कपड़े को आवर्धक कांच की सहायता से ध्यान से देखा जाता है। रीड  के डेंट वायर के कारण ताना दिशा के साथ असमान वायु क्षेत्र को स्पष्ट रूप से पहचाना जा सकता है और कपड़े में ताना और बाने की दिशा तय की जा सकती है।

 
कुछ कपड़ों में, एंड्स पर डेंट के माध्यम से ताने की दिशा की पहचान  की  जाती   है। इस प्रकार के कपड़े में डेंटिंग आर्डर के हिसाब से एंड्स  के बीच लगभग एक समान एयर स्पेस  का अंतर होता है और इसलिए कपड़े में डेंट वायर का निशान स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देता है। इस तरह की स्थिति में, दो आसन्न सिरों के बीच असमान एयर स्पेस  को देखने के लिए तकनीशियन को अतिरिक्त देखभाल की आवश्यकता होती है। "जैसे ही कपड़ा टेक-अप रोलर से बाहर आता है, इसकी चौड़ाई सिकुड़ जाती है। सिरे एक-दूसरे के करीब आते हैं लेकिन सिकुड़न के दौरान  सिरे से सिरे  के बीच में एक असमान एयर स्पेस  उत्पन्न होता है"।
कृपया ध्यान दें कि कपड़े में एंड्स  की तुलना में पिक्स अधिक सीधे दिखते हैं।

 
दिए गए कपड़े के नमूने के ताना और बाने की दिशा का निर्णय लेने में कुछ सहायक कारक निम्नलिखित हैं:


एंड्स पर इंच और पिक्स पर इंच:


एंड्स प्रति इंच और पिक्स प्रति इंच हमेशा ताना और बाने की दिशा की पहचान करने में मदद नहीं करते हैं लेकिन अधिकतम फैब्रिक में, प्रति इंच के एंड्स, पिक्स प्रति इंच से अधिक रखे जाते हैं। दो कारण हैं जो एक बुनकर को ईपीआई को पीपीआई से अधिक रखने पर जोर देते हैं। पहला कारण उत्पादन की लागत है। उच्च पीपीआई कपड़े की बुनाई लागत में प्रत्यक्ष वृद्धि का कारण बनता है। दूसरा कारण बुनाई के दौरान कपड़े की चौड़ाई में सिकुड़न है। प्लेन फैब्रिक में ताना और बाने का अनुपात 55:45 रखा जाता है। यह ताना और बाना अनुपात दक्षता, उत्पादकता और गुणवत्ता के मामले में सर्वोत्तम परिणाम देता है। जैसे-जैसे ताना और बाने का अनुपात बराबर होने लगता है, बुनाई के दौरान चौड़ाई के हिसाब से कपड़े का सिकुड़न बढ़ता जाता है। यह बढ़ा हुआ संकोचन दोनों किनारों पर ताना टूटने की दर में वृद्धि का कारण बनता है। बुनाई के दौरान दोनों सेल्वेज पर कपड़ा भी फटने लगता है। इस तरह बुनकर ताना और बाने की दिशा तय कर सकता है।
ताना और  बाना क्रिम्प:

ताना क्रिम्प  और बाना क्रिम्प  भी कपड़े के नमूने में ताना और बाने की दिशा तय करने में मदद करता है। "किसी भी ग्रे कपड़े में, ताना क्रिम्प  हमेशा बाने की क्रिम्प  से अधिक होता है"। बुनकर ताने और बाने की सहायता से अपना निर्णय ले सकता है।


कपड़े में प्रयुक्त यार्न का प्रकार:


कुछ कपड़ों में सिंगल प्लाई और डबल प्लाई यार्न का एक साथ उपयोग किया जाता है। एक प्रकार के धागे का उपयोग ताने में किया जाता है और दूसरे प्रकार के धागे का उपयोग बाने में किया जाता है। इस प्रकार के कपड़े में, बुनकर हमेशा ताने में डबल प्लाई यार्न पसंद करते हैं क्योंकि सिज़िंग   की लागत डबल प्लाई ताना यार्न में शामिल नहीं होती है।


चरण 2  एंड्स पर इंच और पिक्स पर इंच:

 
अधिकांश कपड़े में मैग्नीफाइंग गिलास  की मदद से इन मापदंडों को आसानी से निर्धारित किया जा सकता है। "गणना पर्याप्त प्रकाश स्रोत के तहत की जानी चाहिए। विपरीत रंग की पृष्ठभूमि हमेशा कपड़े के नमूने के नीचे होनी चाहिए"। स्वैच के तहत यह विपरीत रंग की पृष्ठभूमि एयर स्पेस  और यार्न के बीच  स्पस्ट दृष्टता के  अंतर को बढ़ाने में मदद करती है।



एक तकनीशियन ईपीआई और पीपीआई को आसानी से देख और गिन सकता है। तकनीशियन को हमेशा पूरे एक इंच में एंड्स या पिक्स को गिनना चाहिए। कुछ तकनीशियन एंड्स  या पिक्स को गिनने के लिए आधा इंच या चौथाई इंच का उपयोग करते हैं। यह अभ्यास सटीक परिणाम नहीं देता है।

 
"कुछ कपड़े जैसे टवील और साटन में प्रति वर्ग इंच धागे की संख्या अधिक होती है, एंड्स  या पिक्स की गिनती बहुत कठिन हो जाती है
तकनीशियन को  इस प्रकार के कपड़ों में, प्रति इंच एन्ड  और प्रति इंच पिक्स को वीव रिपीट  की मदद से सटीक रूप से निर्धारित करना आसान होता है "।
कुछ कपड़ों में, एंड्स  या पिक्स  एक दूसरे से ओवरलैप हो जाते  है। इस तरह के फैब्रिक में एक इंच के फैब्रिक को खोलकर एंड्स या पिक्स की गिनती की जाती है।


चरण 3 कपड़े के जीएसएम का निर्धारण:


फैब्रिक का जीएसएम निर्धारित करने का तरीका फैब्रिक स्वैच के आकार की उपलब्धता के अनुसार अपनाया जाता है। कभी-कभी फैब्रिक स्वैच बहुत छोटा होता है। आवश्यक सर्किल  को काटना संभव नहीं हो पाता है। कपड़े का GSM दूसरा तरीका अपनाकर पाया जाता है। जीएसएम के निर्धारण के तरीके नीचे दिए गए हैं:


जीएसएम कटर का उपयोग करके:


यदि कपड़े के नमूने का आकार पर्याप्त है, तो कपड़े की एक डिस्क को राउंड  कटर की सहायता से काटा जाता है। कपड़े की इस डिस्क को तोलने के पैमाने पर तौला जाता है।
GSM = फैब्रिक डिस्क का वजन (ग्राम) x 100



अब एक सवाल उठ सकता है कि हम सर्कल के वजन को 100 से क्यों गुणा करते हैं। यह सिर्फ फैब्रिक सर्कल के क्षेत्रफल के कारण  किया जाता है। हम कपड़े के एक वर्ग मीटर से एक ही आकार के 100 फैब्रिक सर्कल प्राप्त कर सकते हैं। चूँकि हम एक वृत्त का भार ज्ञात करते हैं, इसलिए कपड़े के एक वर्ग मीटर का भार ज्ञात करने के लिए हम वृत्त के भार को 100 से गुणा करते हैं।



जीएसएम कटर का उपयोग किए बिना:


यदि कपड़े के नमूने में डिस्क काटने के लिए उपयुक्त आकार नहीं है तो कपड़े के नमूने को आयताकार आकार में काटा जाता है। "कपड़े के नमूने की लंबाई और चौड़ाई सेंटीमीटर में मापी जाती है"। नीचे ग्राफिक देखें।


अब कपड़े का GSM निम्न सूत्र का उपयोग करके निर्धारित किया जाता है:



बिना कपड़े काटे जीएसएम निर्धारित करना :

कई बार आपका खरीदार आपको कपड़ा काटने की अनुमति नहीं देता है। इस तरह की स्थिति में, टुकड़े की लंबाई, चौड़ाई और वजन को सटीक रूप से मापा जाता है और कपड़े के जीएसएम की गणना निम्न सूत्र की सहायता से की जाती है:



चरण 4 वार्प काउंट और वेफ्ट काउंट  का निर्धारण:


कपड़े की ताना और बाने की काउंट का  सटीक रूप से निर्धारित की जानी चाहिए। कपड़े से ताना या बाने का धागा निकाला जाता है। सूत की लंबाई मीटर में मापी जाती है और उसका वजन ग्राम में मापा जाता है। अब तकनीशियन निम्नलिखित सूत्र का उपयोग करके ताना या बाने के धागे की काउंट की गणना कर सकते हैं:




चरण 5 ताना और बाने के धागे और ट्विस्ट की  दिशा और ट्विस्ट  की डिग्री का निर्धारण:


ट्विस्ट की डिग्री यार्न का एक बहुत ही महत्वपूर्ण पैरामीटर है क्योंकि यार्न ट्विस्ट सीधे कई फैब्रिक गुणों को प्रभावित करता है। नमूने के अनुसार समान फैब्रिक गुणों को प्राप्त करने के लिए यार्न ट्विस्ट का ठीक से विश्लेषण किया जाना चाहिए। यार्न खरीदने से पहले एक बुनकर द्वारा टीपीआई और ट्विस्ट की दिशा दोनों की जांच की जानी चाहिए। यदि किसी बुनकर के पास इन-हाउस परीक्षण सुविधा नहीं है, तो उसे प्रयोगशाला के बाहर से इसकी व्यवस्था करनी चाहिए।



चरण 6 ताना और बना  क्रिम्प  का निर्धारण:


ताना रीगेन :


 ताना लंबाई और कपड़े की लंबाई  के बीच के अंतर तथा र कपडे की लम्बाई के  प्रतिशत में अनुपात को   फैब्रिक का वार्प रीगेन कहा जाता है।



यदि हमारे पास फैब्रिक स्वैच है, तो हम नीचे दिए गए फॉर्मूले का उपयोग करके ताना क्रिंप (रीगेन ) निर्धारित कर सकते हैं:


 
  वेफ्ट रीगेन :

सीधी हुई पिक लंबाई और कपड़े की चौड़ाई के बीच का अंतर  को चौड़ाई में प्रतिशत के रूप में व्यक्त किया जाता है जिसे वेफ्ट  क्रिम्प कहा जाता है। इस शब्द को  वेफ्ट रीगेन के रूप में भी जाना जा सकता है।




 नीचे दिए गए फॉर्मूले का उपयोग करके वेट क्रिम्प प्राप्त किया जा सकता है:





 
 चरण 7 ताना और बाने का पैटर्न:


यदि ताने या बाने में बहुरंगी सूत है, तो बुनकर को ताना और बाने के पैटर्न का सही विश्लेषण करना चाहिए। चूंकि ताना पैटर्न वार्प बीम में  सेट होता है, इसलिए ताना पैटर्न विश्लेषण के लिए विश्लेषण के दौरान अतिरिक्त देखभाल की आवश्यकता होती है। ताना पैटर्न में थोड़ी सी गलती बुनकर को भारी नुकसान का कारण बन सकती है। ताने में पैटर्न की गलती को बुनकर किसी भी तरह से ठीक नहीं कर सकता। पूरा कपड़ा रिजेक्ट हो जाता है ।
बुनकर को हमेशा यह ध्यान रखना चाहिए कि ताना पैटर्न की गलती बुनाई में अपूरणीय क्षति है।


चरण 8 कपड़े की बुनाई:


कपड़े की बुनाई कपड़े का एक बहुत ही महत्वपूर्ण पैरामीटर है। कपड़े की बुनाई, ड्राफ्ट और पेग प्लान  का ठीक से और सही तरीके से विश्लेषण किया जाना चाहिए। ड्राफ्ट  एक विशेष कपड़े की बुनाई के लिए करघे में उपयोग किए जाने वाले हील्ड शाफ्ट की संख्या तय करता है। पेग प्लान  हील्ड शाफ्ट के उठाने के क्रम को परिभाषित करता  है।



कृपया ध्यान दें कि ड्राफ्ट  के विश्लेषण के दौरान किसी भी गलती के लिए ताना को फिर से ड्राफ्टिंग करने की आवश्यकता होती है। इससे बुनकर को उत्पादकता का नुकसान होता है।


चरण 9 फैब्रिक सेल्वेज:


कभी-कभी सेल्वेज का प्रकार एक बहुत ही महत्वपूर्ण फैब्रिक पैरामीटर बन जाता है क्योंकि यह उत्पाद की लागत को कुछ हद तक प्रभावित करता है।


चरण 10 सामग्री और मिश्रण प्रतिशत:


एक बुनकर को हमेशा ताना और बाने के धागे की सामग्री का परीक्षण करना चाहिए। यदि सूत को दो रेशों के साथ मिश्रित किया जाता है, तो मिश्रण% का भी परीक्षण किया जाना चाहिए।


Monday, September 27, 2021

फैब्रिक प्रॉपर्टीज भाग - ४ ( fabric properties part - 4)

 फैब्रिक प्रॉपर्टीज भाग - ४ 


कपड़े की सांस लेने की क्षमता( ब्रेअथाबिलिटी): 

कपड़ों के निर्माण के लिए उपयोग किए जाने वाले कपड़ों के लिए कपड़े की सांस लेने की क्षमता बहुत महत्वपूर्ण और वांछनीय विशेषता होती  है। यह विशेषता नियमित रूप से बाहरी गतिविधियों के दौरान कपड़ों के पहनने वाले के आराम से सीधे जुड़ी होती है। एक कपड़े की सांस लेने की क्षमता हमें बताती है कि कपड़े से कितना जल वाष्प गुजर सकता है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि कपड़े के माध्यम से जल वाष्प संचरण की दर या कपड़े के माध्यम से जल वाष्प की मात्रा को पारित करने की दर को कपड़े की सांस लेने की दर कहा जाता है। इसे ग्राम/मीटर²/दिन में मापा जाता है।

श्वसन क्षमता को प्रभावित करने वाले कारक नीचे दिए गए हैं:

कपड़े की प्रति वर्ग इकाई धागे , यार्न की काउंट और वजन: यार्न की काउंट , प्रति वर्ग इंच धागे की संख्या और कपड़े के प्रति वर्ग मीटर वजन कपड़े की सांस लेने की क्षमता से सीधे जुड़े होते हैं क्योंकि ये सभी कपड़े पैरामीटर सीधे कपड़े में उपस्थित    हवाई क्षेत्र को प्रभावित करते हैं। इन सभी मापदंडों के प्रभाव को निम्नलिखित उदाहरणों से समझा जा सकता है:

उदाहरण ए: यदि जीएसएम और दो कपड़ों के प्रति वर्ग इंच में थ्रेड्स की संख्या बराबर है, तो ताना काउंट  और बाने की काउंट  कपड़े की सांस लेने की क्षमता को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण  भूमिका निभाती है। इस मामले में, महीन काउंट के साथ बुने हुए कपड़े बेहतर श्वसन क्षमता दिखाएंगे।

उदाहरण बी: यदि दो कपड़ों की जीएसएम, ताना काउंट  और बाने की काउंट  समान है, तो प्रति वर्ग इंच में धागे की कम संख्या वाले कपड़े सांस लेने का बेहतर परिणाम दिखाएंगे।


 

उदाहरण सी: यदि ताना काउंट , बाने की काउंट  और दो कपड़ों में प्रति वर्ग इंच धागे की संख्या एक दूसरे के समान है, तो उच्च जीएसएम वाले कपड़े खराब सांस देंगे। ऐसे में कपड़े की बुनाई भी सांस लेने में अहम भूमिका निभाती है।

कपड़े में प्रयुक्त सामग्री का प्रकार: सामग्री का प्रकार कपड़े की सांस लेने की क्षमता को बहुत अधिक प्रभावित करता है। सिंथेटिक सामग्री से बने हुए  कपड़े की  सांस लेने  की क्षमता ख़राब होती  है। स्पन यार्न में निरंतर फिलामेंट यार्न की तुलना में बेहतर सांस लेने की क्षमता होती है। सूक्ष्म तंतु सामान्य रेशों की तुलना में बेहतर श्वसन क्षमता प्रदान करते हैं। महीन और लंबे स्टेपल फाइबर मोटे और छोटे स्टेपल रेशों की तुलना में बेहतर श्वसन क्षमता दिखाते हैं।

बुनाई(वीव): यदि जीएसएम, ताना काउंट , बाने की काउंट  और दो कपड़े के प्रति वर्ग इंच धागे की संख्या समान हैं, तो कपड़े की बुनाई कपड़े की सांस लेने में निर्णायक भूमिका निभाती है। सादा बुनाई टवील और साटन की तुलना में खराब  श्वसन क्षमता प्रदर्शित करती है क्योंकि सादे बुनाई में सबसे कम फ्लोट लंबाई होती है। यह छोटी फ्लोट लंबाई कपड़े में मौजूद हवाई क्षेत्र को कम करने में मदद करती है। यहां हम कह सकते हैं कि कम एयरस्पेस वाले फैब्रिक में हमेशा खराब सांस लेने की क्षमता होती है।

कपड़े की धोने की क्षमता(वैशाबिलिटी): 

यह एक कपड़े का एक बहुत ही महत्वपूर्ण गुण  होता है। इस गुण का कुछ अन्य कपड़े गुणों के साथ सीधा और मजबूत संबंध होता है। यह गुण  बहुत महत्वपूर्ण कपड़े गुणों के निर्धारण में एक निर्णायक भूमिका निभाती है जो कपड़े की सतह, हैंडल , रंग स्थिरता, कपड़े के जीवन, स्पर्श और महसूस को प्रभावित करती है। चूंकि हम जानते हैं कि उपयोग के बाद समय के नियमित अंतराल पर कपड़े धोए जाते हैं, इसलिए कपड़े को हमेशा सर्वोत्तम संभव धोने योग्य होना चाहिए। कपड़े की रंग, आयामी स्थिरता, स्पर्श, महसूस और कपड़े की उपस्थिति में बदलाव के बिना पानी और साबुन से हाथ से या यंत्रवत् धोने की क्षमता को कपड़े की धोने की क्षमता कहा जाता है।

 यह यार्न की गुणवत्ता, प्रयुक्त सामग्री के प्रकार और रंगाई की गुणवत्ता आदि पर निर्भर करता है।

घर्षण का गुणांक: 

कपड़े के घर्षण का गुणांक कपड़े की सतह की घर्षण विशेषता के बारे में बताता है। एक कपड़े के घर्षण का गुणांक उस कोण का स्पर्शरेखा होता है जिस पर कपड़े से ढका एक ब्लॉक अपने स्वयं के वजन के कारण स्लाइड करना शुरू कर देता है जब इसे उसी कपड़े से ढकी हुई सतह पर रखा जाता है। यह  वह गुण है जो सीधे कपड़े की चिकनाई से जुड़ी होती है। घर्षण के गुणांक को प्रभावित करने वाले कारक नीचे दिए गए हैं:

यार्न का प्रकार: स्पन यार्न से बना कपड़ा निरंतर फिलामेंट यार्न की तुलना में एक उच्च कोण पर स्लाइड करना शुरू कर देता है क्योंकि स्पन यार्न में निरंतर फिलामेंट यार्न की तुलना में बहुत अधिक टूटा हुआ सतह क्षेत्र होता है। कम टीपीएम (प्रति मीटर ट्विस्ट ) वाले निरंतर फिलामेंट यार्न निचले स्लाइडिंग कोण पर स्लाइड करना शुरू कर देता है। यह केवल सूत में मौजूद ट्विस्ट की कम डिग्री के कारण ही खुश होता है।

सामग्री का प्रकार: रेशम के रेशे का सभी प्राकृतिक रेशों में सबसे कम फिसलने वाला कोण होता है। अधिकांश प्राकृतिक रेशों में सिंथेटिक फाइबर की तुलना में अधिक स्लाइडिंग कोण होता है

कपड़े की बुनाई: सादे बुनाई की तुलना में साटन की बुनाई में अधिक चिकनाई होती है। यह सतह चिकनाई एक साटन बुनाई में स्लाइडिंग कोण को कम करने में मदद करती है।

कपड़े में प्रयुक्त फिनिशिंग एजेंट: कपड़े के घर्षण का गुणांक सीधे अंतिम कपड़े खत्म होने से जुड़ा होता है।

सीवन की ताकत(सीम स्ट्रेंथ): 

जब दो कपड़े सिलाई में एक साथ जुड़ते हैं, तो उत्पाद को मूल कपड़े के समान जोड़ के बिंदु पर समान ताकत की आवश्यकता होती है। कपड़े की सीवन ताकत

एक परिधान और अन्य उत्पाद के स्थायित्व के बारे में जानकारी देती है । कपड़े की सीवन की ताकत कपड़े की एक बहुत ही महत्वपूर्ण गुण होती  है। परिधान में इस्तेमाल होने वाले कपड़े में बेहतर सीवन की ताकत होनी चाहिए क्योंकि कपड़ों में जोड़ों की सिलाई पर कपड़े के फिसलने की संभावना हमेशा बनी रहती है। जब कपड़ों में इस्तेमाल किया जाने वाला कपड़ा नियमित बाहरी गतिविधियों के दौरान स्ट्रेचिंग लोड के अंतर्गत आता है, और जैसे-जैसे स्ट्रेचिंग लोड बढ़ता है, सिलाई के जोड़ों पर कपड़ा भी फिसलने लगता है, अगर उसमें सीवन की ताकत खराब है।

सीवन की मजबूती को प्रभावित करने वाले कारक नीचे दिए गए हैं:

यार्न की काउंट , निर्माण और कपड़े का जीएसएम: यार्न की काउंट , कपड़े का निर्माण और जीएसएम सीधे कपड़े की सीवन की ताकत को प्रभावित करते हैं। आप निम्नलिखित उदाहरणों की सहायता से इन फैब्रिक मापदंडों के प्रभाव को समझ सकते हैं:

फैब्रिक ए: यदि दो फैब्रिक के यार्न काउंट और जीएसएम समान हैं।

इस मामले में, प्रति वर्ग इंच में अधिक संख्या में धागे वाले कपड़े बेहतर सीवन की ताकत देंगे।

फैब्रिक बी: यदि यार्न की काउंट और दो फैब्रिक की संरचना समान है।

इस मामले में, उच्च जीएसएम वाले कपड़े बेहतर सीवन की ताकत दिखाते हैं।

फैब्रिक सी: यदि दो फैब्रिक की संरचना  और जीएसएम समान है।

इस मामले में, मोटे काउंट  के साथ बुने हुए कपड़े बेहतर सीवन ताकत बनाते हैं।

वीव : कपड़े की वीव कपड़े की सीवन की मजबूती में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। रिपीट में अधिक संख्या में इंटरलेसिंग पॉइंट वाली बुनाई हमेशा बेहतर सीवन ताकत देती है क्योंकि ये इंटरलेसिंग पॉइंट कपड़े के ताना और बाने के बीच एक चिपकने वाला बल प्रदान करते हैं। चूँकि हम जानते हैं कि प्लेन वीव  में रिपीट में इंटरलेसिंग पॉइंट्स की अधिकतम संभव संख्या होती है, इसलिए प्लेन वीव  सभी वीव्स  के बीच अधिकतम सीव्ड  सीम स्ट्रेंथ बनाता है।

प्रयुक्त सामग्री का प्रकार: सामग्री का प्रकार कुछ हद तक सीवन की ताकत को प्रभावित करता है। काता यार्न में फिलामेंट यार्न की तुलना में बेहतर सीवन ताकत होती है। प्राकृतिक रेशों में मानव निर्मित रेशों की तुलना में बेहतर सिलने की शक्ति होती है।

सीवन की सीवन फिसलन: 

यह कपड़े का एक बहुत ही महत्वपूर्ण गुण है। यह परिधान में पहनने, घर्षण और तनाव के दौरान सीम की फिसलन को रोकने के लिए सुनिश्चित करता है। जब सिलाई की सुई सिलाई के दौरान कपड़े में प्रवेश करती है, तो सिलाई की सुई के कारण धागे के टूटने की संभावना हमेशा बनी रहती है लेकिन कपड़े की एक गुण  कपड़े के धागे को टूटने से बचाती है। जब सिलाई सुई कपड़े में प्रवेश करती है, तो कपड़े में मौजूद हवाई क्षेत्र के कारण यार्न सिलाई सुई के बाएं या दाएं तरफ स्लाइड करता है। कपड़े में सूत की गतिशीलता सिलाई के दौरान सूत को फटने से बचाती है। यदि कपड़े में यार्न की खराब गतिशीलता है, तो सिलाई की सुई यार्न को तोड़ सकती है, जिसके परिणामस्वरूप कपड़ों में सीवन की फिसलन हो जाती है। यह फाइबर सामग्री, यार्न गिनती, निर्माण, कपड़े की कॉम्पैक्टनेस और कपड़े के प्रति वर्ग इंच धागे की संख्या से बहुत प्रभावित होता है। फैब्रिक कंस्ट्रक्शन (EPI, PPI, काउंट, वेट टाइप) फैब्रिक के सिले हुए सीम स्लिपेज के प्रदर्शन में एक प्रमुख भूमिका निभाते हैं। ईपीआई और पीपीआई में वृद्धि के साथ कवर फैक्टर बढ़ता है, इस प्रकार अधिक से अधिक कपड़े की ताकत होती है, कपड़े और सीम टूटने का प्रतिरोध उतना ही अधिक होता है।

ज्वलनशीलता: 

यह कपड़े की एक बहुत ही महत्वपूर्ण विशेषता है। कपड़े की ज्वलनशीलता कपड़े की विशेषता है जो प्रज्वलन की सापेक्ष आसानी और दहन को बनाए रखने की सापेक्ष क्षमता से संबंधित है। यह कपड़े में प्रयुक्त सामग्री के प्रकार पर निर्भर करता है। यह बच्चों के पहनने के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण गुण होता  है। सिंथेटिक फाइबर प्राकृतिक रेशों की तुलना में तेजी से प्रज्वलित होने लगते हैं। ऊन के रेशे अन्य प्राकृतिक रेशों की तुलना में धीमी गति से जलते हैं। ढीले और हल्के वजन के कपड़ों की तुलना में कॉम्पैक्ट और भारी कपड़े को प्रज्वलित होने में अधिक समय लगता है।

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Friday, September 24, 2021

फैब्रिक प्रॉपर्टीज भाग - ३ ( fabric properties part - 3)

 फैब्रिक प्रॉपर्टीज भाग - ३


फैब्रिक पिलिंग: 

जब कपड़े का उपयोग परिधान, फ्लैट शीट, फिटेड शीट, कार शीटिंग, टेबल लिनन आदि के लिए किया जाता है, तो यह विभिन्न प्रकार की स्थितियों जैसे रगड़, स्ट्रेचिंग, लाइटिंग, बारिश आदि से गुजरता है। कपड़े की सतह रगड़ से  बुरी तरह प्रभावित होती है।  यह रगड़ की स्थिति कपड़े की सतह पर छोटे छोटे बॉल्स  उत्पन्न करती है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि फ़ैब्रिक पहनने के दौरान फ़ैब्रिक की सतह पर उभरे हुए रेशों के उलझने के कारण बनने वाली बॉल्स  को पिलिंग कहा जाता है। कपड़े की सतह पर ये बॉल्स  रगड़ने से बनते हैं। कपड़े की पिलिंग हमेशा कपड़े की गुणवत्ता का एक प्रमुख मुद्दा है क्योंकि यह सीधे कपड़े की सतह को प्रभावित करता है। फैब्रिक पिलिंग को प्रभावित करने वाले कुछ कारक नीचे दिए गए हैं:

यार्न की गुणवत्ता: कपड़े में इस्तेमाल होने वाले यार्न की गुणवत्ता का पिलिंग पर बड़ा प्रभाव पड़ता है। कम बालों वाले धागे में हमेशा बेहतर पिलिंग प्रतिरोध होता है। कॉम्ब्ड  या कॉम्पैक्ट यार्न कपड़े के पिलिंग प्रतिरोध को बेहतर बनाने में मदद करता है। महीन और लंबे स्टेपल फाइबर से काता गया यार्न हमेशा उच्च पिलिंग प्रतिरोध देता है। काता यार्न हमेशा निरंतर फिलामेंट यार्न की तुलना में बेहतर पिलिंग प्रतिरोध रखता है।

सामग्री का प्रकार: प्राकृतिक रेशों में मानव निर्मित रेशों की तुलना में बेहतर पिलिंग प्रतिरोध होता है। पुन: उत्पन्न फाइबर भी खराब पिलिंग प्रतिरोध पैदा करते हैं।

यार्न के मोड़ की डिग्री: यार्न में मौजूद ट्विस्ट की इष्टतम मात्रा कपड़े के पिलिंग प्रतिरोध में सुधार करने में मदद करती है क्योंकि ट्विस्ट की डिग्री फाइबर को यार्न में एक साथ रखने में मदद करती है और वे रगड़ के दौरान यार्न से बाहर नहीं आते हैं। कपड़े की सतह से।

कपड़े की बुनाई: कपड़े की बुनाई का कपड़े के पिलिंग प्रतिरोध पर बहुत कम प्रभाव पड़ता है। अधिक इंटरलेसिंग पॉइंट वाली बुनाई कपड़े के बेहतर पिलिंग प्रतिरोध को दर्शाती है। सादे बुनाई में टवील या साटन की बुनाई की तुलना में बेहतर पिलिंग प्रतिरोध होता है क्योंकि छोटी फ्लोट लंबाई कपड़े की सतह पर तंतुओं को बाहर आने से रोकती है। लंबी फ्लोट लंबाई वाली बुनाई हमेशा खराब पिलिंग प्रतिरोध के रूप में परिणत होती है।

कपड़े की थ्रेड काउंट  और संरचना: कपड़े की थ्रेड काउंट और संरचना  के प्रभाव को निम्न उदाहरण से समझा जा सकता है:

मान लीजिए कि दो कपड़ों में समान ताना और बाने की गिनती होती है। इस मामले में, अधिक ई.पी.आई. और पी.पी.आई. कपड़े की मजबूती के कारण बेहतर पिलिंग प्रतिरोध दिखाएगा।

मान लीजिए कि दो कपड़ों में समान E.P.I और P.P.I है।

इस मामले में, मोटे ताना काउंट  और बाने की काउंट वाले कपड़े कपड़े में बेहतर पिलिंग प्रतिरोध दिखाएंगे।


कपड़े का ड्रेप गुणांक: 

यह कपड़े की एक बहुत ही महत्वपूर्ण विशेषता है। यह गुरुत्वाकर्षण द्वारा कपड़े के विरूपण को निर्धारित करता है जब इसे अपने वजन के नीचे लटका दिया जाता है। यह ड्रेप्ड सैंपल के क्षेत्र और सपोर्टिंग डिस्क के बीच के अंतर और सैंपल के एरिया और सपोर्टिंग डिस्क के बीच के अंतर का अनुपात है। इसका मान हमेशा एक से कम हो जाता है। ड्रेप गुणांक का निम्न मान कपड़े के अच्छे ड्रेपिंग गुणों को दर्शाता है। फैब्रिक के ड्रेप गुणांक को प्रभावित करने वाले कुछ कारक नीचे दिए गए हैं:

कपड़े की प्रति वर्ग इकाई वजन: कपड़े के प्रति वर्ग इकाई वजन का कपड़े के ड्रेप गुणांक पर सीधा प्रभाव पड़ता है। प्रति वर्ग इकाई कम वजन वाले कपड़े में हमेशा बेहतर ड्रेपिंग गुण होते हैं।

कपड़े की थ्रेड काउंट  और संरचना: यदि दो कपड़ों के लिए धागे की काउंट  समान है, तो प्रति वर्ग इंच में उच्च धागे वाले कपड़े खराब ड्रेपिंग गुण दिखाते हैं।

यदि प्रति वर्ग इंच में धागे की गिनती दो कपड़ों के लिए समान है, तो मोटे धागे की काउंट  वाले कपड़े खराब ड्रेपिंग गुण देते हैं।

सामग्री का प्रकार: कपड़े में उपयोग की जाने वाली सामग्री के प्रकार का कपड़े पर सीधा प्रभाव पड़ता है। कॉटन फाइबर फ्लैक्स फाइबर की तुलना में बेहतर ड्रेपिंग गुण देता है। नरम सामग्री हमेशा बेहतर ड्रेपिंग गुण दिखाती है।

कपड़े की बुनाई: ढीली बुनाई या कम इंटरलेसिंग पॉइंट वाली बुनाई बेहतर ड्रेपिंग गुण देती है। छोटी फ्लोट लंबाई के कारण सादे बुनाई साटन या टवील बुनाई की तुलना में खराब ड्रेपिंग गुण दिखाती है।

नमी अवशोषण ( मॉइस्चर अब्सॉर्बेंसी): 

कपड़े की नमी अवशोषण कपड़े की एक बहुत ही महत्वपूर्ण गुण है क्योंकि यह सीधे कपड़े के अन्य गुणों से जुड़ा हुआ है। जब कोई कपड़ा नमी के सीधे संपर्क में आता है, तो वह नमी को सोखने लगता है। नमी लेने की दर और अवशोषित नमी की मात्रा अलग-अलग कपड़े के लिए अलग-अलग होती है। उपभोक्ता दो अलग-अलग कपड़ों की नमी अवशोषण की तुलना निम्नानुसार कर सकता है:

एक ही आकार और वजन के दो कपड़े के नमूने लें। एक बीकर लें और उसमें आसुत जल भरें। पहले कपड़े के नमूने को बीकर में डालें और उस समय को रिकॉर्ड करें जब कपड़ा पूरी तरह से गीला हो जाए। जैसे ही कपड़ा पानी में डुबकी लगाना शुरू करता है, फिर से समय रिकॉर्ड किया जाता  है। अब इस प्रक्रिया को दूसरे फैब्रिक स्वैच के साथ दोहराएं। अब दोनों फैब्रिक के बीच तुलना करें। कपड़े, जो कम गीला होने का समय और डुबकी लेने का समय ले रहा है, बेहतर नमी अवशोषण दिखाएगा।

नमी को प्रभावित करने वाले कारक

शोषकता नीचे दी गई है:

यार्न ट्विस्ट की डिग्री: यार्न ट्विस्ट की मात्रा कपड़े की नमी को अवशोषित करने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। एक लो ट्विस्ट यार्न में हमेशा अधिक एयर स्पेस होता है। जैसे-जैसे ट्विस्ट की मात्रा बढ़ती है, यार्न अधिक कॉम्पैक्ट हो जाता है और यार्न में एयरस्पेस भी कम हो जाता है। धागों में वायुक्षेत्र कम होने के कारण नमी सोखने की क्षमता भी कम हो जाती है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि कपड़े की नमी अवशोषण यार्न मोड़ की डिग्री के व्युत्क्रमानुपाती होती है।

कपड़े की यार्न काउंट  और निर्माण: कपड़े की गिनती और निर्माण के प्रभाव को निम्नलिखित उदाहरणों की मदद से समझा जा सकता है:

मान लीजिए कि दो कपड़े A और B हैं।

और दोनों को एक समान यार्न काउंट  के साथ बुना गया है।

फैब्रिक ए में फैब्रिक बी की तुलना में प्रति वर्ग इंच (ईपीआई और पीपीआई) अधिक धागे हैं।

इस मामले में, कपड़े ए कम नमी को अवशोषित करता है क्योंकि इस कपड़े में हवा का स्थान कम हो जाता है।

यदि दो कपड़ों में प्रति वर्ग इंच (EPI और PPI) के समान धागे हैं, तो महीन काउंट वाले यार्न से बुना हुआ कपड़ा नमी को बेहतर ढंग से अवशोषित करता है क्योंकि इस कपड़े में वायु क्षेत्र बढ़ जाता है।

नोट: अब इन दिनों, स्पिनरों ने एयर रिच  यार्न विकसित किया है, जो कपड़े  नमी को बेहतर ढंग से अवशोषित करता है। इस सूत को खोखला सूत भी कहते हैं।

बुनकर इस हवा से भरपूर यार्न की मदद से कपड़े की यार्न काउंट और निर्माण को बदले बिना कपड़े की नमी को अवशोषित कर सकते हैं।

प्रयुक्त सामग्री का प्रकार: सामग्री का प्रकार भी कपड़े की नमी को अवशोषित करने में निर्णायक भूमिका निभाता है। चूंकि हम जानते हैं कि सिंथेटिक सामग्री चरित्र में हाइड्रोफोबिक हैं, इसलिए सिंथेटिक सामग्री हमेशा खराब नमी को अवशोषित करती है। लंबे स्टेपल और महीन रेशों से बना सूत कपड़े की नमी को बेहतर ढंग से अवशोषित करता है। स्पन यार्न से बने फैब्रिक में फिलामेंट यार्न की तुलना में बेहतर नमी अवशोषण होता है क्योंकि स्पन यार्न में बहुत अधिक वायु स्थान मौजूद होता है। मल्टीफिलामेंट यार्न में मोनोफिलामेंट यार्न की तुलना में बेहतर नमी अवशोषण होता है।

वीव: कपड़े की बुनाई का भी कपड़े की नमी सोखने की क्षमता पर बहुत प्रभाव पड़ता है। चूंकि हम जानते हैं कि छोटी फ्लोट लंबाई के कारण सादे बुनाई में न्यूनतम वायु क्षेत्र होता है, इसलिए यह खराब नमी को अवशोषित करता है। बड़ी फ्लोट लंबाई और हवाई क्षेत्र के कारण साटन और टवील बुनाई नमी अवशोषण में सुधार दिखाती है।

जलरोधी ( वाटर रेपैलेन्सी): 

कपड़े की जल रोधी गुण नमी को अवशोषित करने के लिए कपड़े का विरोध करने की क्षमता है। जल विकर्षक को प्रभावित करने वाले कारक नीचे दिए गए हैं:

जीएसएम, यार्न की गिनती और कपड़े का निर्माण: उच्च जीएसएम वाले कपड़े हमेशा हल्के जीएसएम कपड़े की तुलना में अधिक पानी को पीछे नहीं हटाते हैं। किसी कपड़े की जल-विकर्षकता सीधे कपड़े में मौजूद वायु क्षेत्र से जुड़ी होती है। सबसे कम संभव एयर स्पेस  वाले उच्च जीएसएम कपड़े बेहतर जल विकर्षक बन जाते हैं। यदि हेवीवेट कपड़े में हल्के कपड़े की तुलना में अधिक हवा की जगह होती है, तो हल्के कपड़े में मौजूद सबसे कम वायु स्थान की वजह से बेहतर जलरोधी दिखाई देगा। आम तौर पर, हैवीवेट फैब्रिक में, एंड टू एंड या पिक टू पिक गैप न्यूनतम संभव स्तर तक कम हो जाता है, इसलिए हैवीवेट फैब्रिक बेहतर जलरोधी दिखाता है।

एक कपड़े के पानी के पुनर्विक्रय का यार्न की काउंट  और कपड़े के निर्माण के साथ बहुत निर्भर होती  है।

यदि दो कपड़ों में प्रति वर्ग इंच के बराबर धागे हैं, तो मोटे काउंट के साथ बुने हुए कपड़े में पानी की बेहतरी दिखाई देगी। यदि दो कपड़ों में समान ताना और बाने की संख्या होती है, तो प्रति वर्ग इंच में अधिक धागे वाले कपड़े बेहतर जल विकर्षक दिखाएंगे। ऐसा फैब्रिक में मौजूद एयरस्पेस की वजह से होता है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि कपड़े की जल विकर्षकता कपड़े में मौजूद वायु क्षेत्र के व्युत्क्रमानुपाती होती है।

प्रयुक्त सामग्री का प्रकार: हाइड्रोफोबिक प्रकृति वाली सामग्री हमेशा बेहतर जल विकर्षक दिखाती है। कृत्रिम रेशों में प्राकृतिक रेशों की तुलना में बेहतर जलरोधी होता है। सिंथेटिक स्पून यार्न की तुलना में निरंतर फिलामेंट यार्न बेहतर जल विकर्षकता दर्शाता है। मोनोफिलामेंट यार्न हमेशा मल्टीफिलामेंट यार्न की तुलना में बेहतर जलरोधी होता है।

यार्न ट्विस्ट की डिग्री: यार्न ट्विस्ट की डिग्री भी कपड़े की जल-विकर्षकता को प्रभावित करती है। जैसे-जैसे ट्विस्ट की मात्रा बढ़ती है, यार्न में एयरस्पेस भी कम होता जाता है। अब यार्न अधिक कॉम्पैक्ट हो जाता है। इस तरह, यार्न ट्विस्ट की बढ़ी हुई डिग्री कपड़े की जल-विकर्षकता को बेहतर बनाने में मदद करती है।

वीव: कपड़े की बुनाई का कपड़े की जलरोधी क्षमता पर बहुत प्रभाव पड़ता है। यदि दो फैब्रिक में बुनाई के अलावा सभी फैब्रिक पैरामीटर हैं, तो प्लेन वेट वाले फैब्रिक में प्लेन वेट फैब्रिक में मौजूद न्यूनतम संभव वायु स्थान के कारण साटन या टवील वेट की तुलना में बेहतर वाटर रेपेलेंसी दिखाई देगी।

कपड़े की तापीय चालकता: 

चालन द्वारा उच्च तापमान से कम तापमान की सतह की तरफ गर्मी को स्थानांतरित करने की  कपड़े की क्षमता को कपड़े की तापीय चालकता कहा जाता है। 

 इसे वाट प्रति सेकंड प्रति वर्ग मीटर में मापा जाता है। यह मुख्य रूप से निम्नलिखित कारकों पर निर्भर करता है:

जीएसएम, यार्न की गिनती और कपड़े का निर्माण: चूंकि हम जानते हैं कि जीएसएम, यार्न की काउंट  और कपड़े का निर्माण सीधे कपड़े में मौजूद एयर स्पेस  को प्रभावित करता है, इसलिए न्यूनतम हवा  स्थान वाले कपड़े की खराब तापीय चालकता होती है क्योंकि सबसे कम हवा अंतरिक्ष गर्मी को उच्च तापमान से कम तापमान में स्थानांतरित करने से रोकता है।

उपयोग की जाने वाली सामग्री का प्रकार: उपयोग की जाने वाली सामग्री के प्रकार का भी उपयोग की जाने वाली सामग्री के प्रकार से बहुत सरोकार होता है। अच्छी ऊष्मा चालक सामग्री से बना कपड़ा हमेशा कपड़े की बेहतर तापीय चालकता देता है। कपास के रेशे ऊनी रेशे की तुलना में बेहतर तापीय चालकता प्रदर्शित करते हैं। निरंतर फिलामेंट यार्न से बना कपड़ा स्टेपल यार्न की तुलना में बेहतर तापीय चालकता दिखाता है। मानव निर्मित रेशे प्राकृतिक रेशों की तुलना में बेहतर तापीय चालकता दिखाते हैं।

 कपड़े की प्रकाश पारगम्यता: 

कपड़े की प्रकाश की डिग्री को कपड़े से गुजरने  देने की क्षमता को कपड़े की प्रकाश पारगम्यता कहा जाता है। यह कपड़े के निर्माण, कपड़े की सामग्री के प्रकार आदि पर निर्भर करता है। अधिक वायु क्षेत्र वाले कपड़े हमेशा बेहतर प्रकाश पारगम्यता देते हैं।

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