Wednesday, October 19, 2022

विभिन्न प्रकार के कॉम्पैक्ट स्पिनिंग सिस्टम्स, कॉम्पैक्ट स्पिनिंग के उद्देश्य, लाभ और सीमाएं (Objectives of compact spinning system, different types of compact spinning systems advantages and limitations)

 कॉम्पैक्ट स्पिनिंग  प्रणाली (कॉम्पैक्ट स्पिनिंग सिस्टम):

रिंग स्पिनिंग प्रक्रिया में कॉम्पैक्ट स्पिनिंग तकनीक की आवश्यकता क्यों होती है?

पारंपरिक रिंग कताई प्रक्रिया में फाइबर्स  के माइग्रेशन  का मुख्य कारण यार्न के निर्माण के दौरान फाइबर्स  के बीच तनाव का अंतर होता है।

जब रिबन की तरह फाइबर बंडल  में ट्विस्ट डाला जाता है और यार्न का निर्माण होता है।

तब फाइबर बंडल के रिबन  के किनारों पर फाइबर्स  तनाव का  का सामना करते हैं और फाइबर्स के बंडल के बीच में फाइबर्स संपीडित होते  हैं जब तक कि अत्यधिक यार्न तनाव न हो।

तनाव को मुक्त करने के लिए, तनाव के अधीन फाइबर यार्न में अपने पथ की लंबाई को छोटा करने की कोशिश करते हैं, जबकि संपीड़न के तहत फाइबर इसे लंबा करने की कोशिश करते हैं।

इसके परिणामस्वरूप, फाइबर्स अपना संपूर्ण पेचदार पथ छोड़ देते हैं और धागे की परतों के बीच माइग्रेशन  करते हैं।

दूसरे शब्दों में, एक लंबे कताई त्रिकोण(स्पिनिंग ट्रायंगल ) के परिणामस्वरूप यार्न में  लंबे समय तक कमजोर बिंदु उत्पन्न होता है, और इस प्रकार रिंग फ्रेम में अधिक अंत टूटता  है।

हालांकि, एक लंबे त्रिकोण की वजह से फाइवर्स  यार्न में बेहतर ढंग से बंधे होते हैं।

कॉम्पैक्ट स्पिनिंग  के उद्देश्य:

कॉम्पैक्ट स्पिनिंग  का मुख्य उद्देश्य कताई त्रिकोण ( स्पिनिंग ट्रायंगल) को खत्म करना होता है क्योंकि फाइबर माइग्रेशन  की समस्या पारंपरिक रिंग स्पिनिंग  प्रक्रिया में बनने वाले कताई त्रिकोण(स्पिनिंग ट्रायंगल) के आकार से जुड़ी होती है।

स्पिनिंग त्रिकोण के लगभग उन्मूलन के कारण कॉम्पैक्ट स्पिनिंग  प्रणाली से लैस रिंग स्पिनिंग  में ट्विस्ट सम्मिलन के दौरान फाइवर्स  के बीच तनाव का अंतर काम  होता है।

इसलिए कॉम्पैक्ट यार्न में फाइबर माइग्रेशन पारंपरिक रिंग स्पन यार्न की तुलना में कम होने की उम्मीद की जा सकती है।

क्लेन ने एक स्टडी में पाया है कि एक छोटा कताई त्रिकोण एक छोटे कमजोर बिंदु का प्रतिनिधित्व करता है और इस प्रकार रिंग स्पिनिंग पोसेस के दौरान एन्ड ब्रेकेज रेट काम होता   है।

यदि कताई त्रिकोण बहुत छोटा है और किनारों पर तंतुओं का विक्षेपण बाइंडिंग-इन के दौरान बहुत तेज होना चाहिए।

· यह सभी तंतुओं के साथ संभव नहीं होता  है। इसलिए एक बहुत ही छोटे  कताई त्रिकोण के परिणामस्वरूप किनारे पर कुछ फाइबर यार्न में एकीकृत नहीं होते हैं, जिसके परिणामस्वरूप ढीले फाइबर या 'फ्लाई'  उत्पन्न होते हैं।

किनारे पर अन्य फाइबर केवल एक छोर पर बंधे हो सकते हैं, जिससे बालों का झड़ना हो सकता है।

कॉम्पैक्ट स्पिनिंग  एक चिकनी  और कम फ्लाई युक्त यार्न  पैदा करती है।

विभिन्न प्रकार के कॉम्पैक्ट स्पिनिंग  सिस्टम्स:

मुख्य रूप से तीन प्रकार के कॉम्पैक्ट स्पिनिंग  सिस्टम्स आज के समय में रिंग स्पिनिंग मशीन में प्रयोग किये जा रहे  हैं जिनका वर्णन नीचे किया गया है:

सुसेन एलाइट कॉम्पैक्ट स्पिनिंग  सिस्टम्स:

· इस कॉम्पैक्ट स्पिनिंग  सिस्टम्स में एक अतिरिक्त 'ड्राफ्टिंग ज़ोन' लगाया जाता  है जो एक मानक थ्री-रोल रिंग स्पिनिंग मशीन पर लगाया जाता है।

इस ड्राफ्टिंग  जॉन में एक सक्शन  ट्यूब के ऊपर एक हवा-पारगम्य लैटिस   एप्रन का घूमता  हैं।

सक्शन ट्यूब के ऊपर एक  नकारात्मक दबाव होता  है और सक्शन तुबे में प्रत्येक स्पिनिंग  स्थिति के लिए फाइबर मूवमेंट  की दिशा में झुका हुआ एक स्लॉट होता है।

जब फाइबर्स सामने वाले रोलर निप लाइन को छोड़ते हैं, तो जालीदार एप्रन सक्शन स्लॉट के ओपनिंग्स  पर फाइबर्स का मार्गदर्शन करता है।

· सक्शन  वायु प्रवाह के कारण फाइबर्स किनारे की ओर बढ़ते हैं और संघनित होते हैं।

· सक्शन स्लॉट्स के ओपनिंग्स  का झुकाव रेशों के प्रवाह की दिशा में होता है।

ये सक्शन  स्लॉट झुकाव स्लॉट पर अपने परिवहन के दौरान फाइबर बैंड पर एक अनुप्रस्थ बल उत्पन्न करके संघनन में मदद करते हैं, जिससे फाइबर बैंड अपनी धुरी के चारों ओर घूमता है।

जाली एप्रन इससे जुड़े रेशों को डिलीवरी निप लाइन तक ले जाता है।

· डिलीवरी  (ड्रिवेन ) शीर्ष रोलर का व्यास फ्रंट बॉटम  (ड्राइविंग) रोलर के व्यास से थोड़ा बड़ा रखा जाता है।

डिलीवरी टॉप रोलर और फ्रंट बॉटम रोलर के बीच व्यास का अंतर संघनक प्रक्रिया के दौरान अनुदैर्ध्य दिशा में तनाव उत्पन्न करता है।

तनाव कर्व्ड फाइबर्स  को सीधा करना सुनिश्चित करता है, और इसलिए नकारात्मक दबाव के संघनक प्रभाव का समर्थन करता है।


रीटर  K44 'ComforSpin' कॉम्पैक्ट  स्पिनिंग सिस्टम:

इस प्रणाली में मुख्य ड्राफ्टिंग जोन के बाद ड्राफ्ट किए गए फाइबर रिबन को बाद में संघनित करने के लिए वायुगतिकीय बलों का उपयोग किया जाता है।

· वायुगतिकीय बलों के परिणामस्वरूप, कताई त्रिकोण बहुत  छोटा हो जाता है या लगभग समाप्त हो जाता है।

· रीटर  K44 ComforSpin कॉम्पैक्ट  स्पिनिंग सिस्टम में तीन-रोलर, डबल-एप्रन द्रफरिंग सिस्टम  शामिल होते हैं ।

· इस सिस्टम  के निकास क्षेत्र को फाइबर संघनन की होने देने   के लायक बनाया जाता  है।

निकास रोलर को एक छिद्रित ड्रम (1) से बदल दिया जाता है, जिसके भीतर एक स्थिर सक्शन यूनिट  होती है जो मशीन की केंद्रीय निष्कर्षण इकाई (2) से जुड़ी होती है।

ड्राफ्टिंग सिस्टम की एक्जिट निप लाइन द्वारा डिलीवर किए गए फाइबर ड्रम की परिधीय गति से चलते हुए छिद्रित ड्रम की सतह पर रखे जाते हैं।

इस तरह, कॉम्फोरस्पिन तकनीक मुख्य ड्राफ्टिंग जोन के बाद वायुगतिकीय समानांतरीकरण और फाइबर्स  के संघनन में मदद करती  है।

· इस कॉम्पैक्ट स्पिनिंग सिस्टम  में कताई त्रिकोण को कम से कम कर दिया जाता  है।

कॉम्पैक्टिंग ज़ोन मशीन का दिल होता है जिसमें छिद्रित ड्रम, सक्शन इंसर्ट और एयर गाइड एलीमेंट होते हैं।

· सकारात्मक रूप से संचालित छिद्रित ड्रम कठोर होकर   रेशों के चिपकने के लिए प्रतिरोधी हो जाता है।

प्रत्येक ड्रम के अंदर की तरफ जरुरत के समय बदला जाने वाला और विशिष्ट आकर के स्लॉट वाला स्थिर सक्शन इन्सर्ट होता है।

· यह ड्रम मशीन के सक्शन सिस्टम से जुड़ा होता  है।

छिद्रित ड्रम में उत्पन्न निर्वात द्वारा निर्मित वायु धारा मुख्य डरफटिंग  के बाद फाइबर्स  को संघनित करती है।

ड्राफ्टिंग ज़ोन के बाद से स्पिनिंग  त्रिकोण तक निप लाइन से फाइबर को पूरी तरह से नियंत्रित किया जाता है।

एक अतिरिक्त निप रोलर ट्विस्ट  को संघनक क्षेत्र में फैलने से रोकता है।

संघनक क्षेत्र में संघनन दक्षता को विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए और पेटेंट किए गए वायु गाइड एलीमेंट  द्वारा बढ़ाया जाता है।

Zinser AIR-COM-TEX 700® कॉम्पैक्ट स्पिनिंग सिस्टम:

यह प्रणाली कताई त्रिकोण को खत्म करने के आधार पर भी काम करती है।

· इस तकनीक में पारंपरिक तीन रोलर्स ड्राफ्टिंग सिस्टम  का उपयोग किया जाता है।

· फाइबर्स ड्राफ्टिंग सिस्टम  से निकलते हैं और एक छिद्रित बेल्ट की सतह पर सक्शन  के वजह से  संघनित हो जाते हैं।

· ट्विस्ट इंसर्शन से पहले संघनित फाइबर स्ट्रैंड की  चौड़ाई में काफी कमी आती  है।

ड्राफ्टिंग सिस्टम से निकलने वाले फाइबर्स  की चौड़ाई और यार्न के व्यास के बीच के अंतर में यह कमी प्रभावी रूप से स्पिनिंग  त्रिकोण को समाप्त कर देती है।

कॉम्पेक्टिंग ज़ोन को अतिरिक्त फीड की एडजस्टेबिलिटी द्वारा कच्चे माल के लिए अनुकूलित किया जा सकता है, क्योंकि दो फ्रंट सिलिंडर के बीच कॉम्पेक्टिंग ज़ोन छिद्रित एप्रन की कम गति से अधिकतम -4.0% के साथ प्रभावित हो सकता है। कॉटन कॉम्पैक्ट कताई प्रक्रिया के लिए तकनीकी दृष्टि से 0 से 4% अतिरिक्त फ़ीड की आवश्यकता होती है।

इस स्पेक्ट्रम के साथ मशीन को सबसे अधिक फाइबर पर सेट किया जा सकता है।

इसका व्यक्तिगत तंतुओं की स्थिति पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है, क्योंकि केवल बिना तनाव वाले और समानांतर तंतुओं को ही विक्षेपित और संकुचित किया जा सकता है।

कॉम्पैक्ट स्पिनिंग के लाभ:

हैरीनेस का कम स्तर।

·बढ़ी हुई स्ट्रेंथ  के धागों के  उत्पादन करने की क्षमता।

लौ ट्विस्ट लेवल  के साथ भी ब्रेक पर बेहतर बढ़ाव।

लो ट्विस्ट के कारण सॉफ्ट फील का होना ।

कॉम्पैक्ट स्पिनिंग  प्रक्रिया एक नई रिंग-यार्न संरचना का निर्माण करती है जो आदर्श स्टेपल फाइबर यार्न निर्माण के करीब होती है।

बेहतर फैब्रिक अपीयरेंस 

· बुनाई के चरण में बेहतर प्रदर्शन।

कच्चे माल का बेहतर उपयोग।

· उच्च वितरण दर प्राप्त की जा सकती है।

· डाउनस्ट्रीम प्रसंस्करण चरणों में लागत बचत।

कम एन्ड ब्रेकेज  की दर के कारण मशीन की दक्षता में सुधार करता है।

इसलिए समान ट्विस्ट  स्तर के साथ पारंपरिक रिंग स्पन यार्न के बराबर यार्न की ताकत बनाए रखते हुए कम गुणवत्ता वाले कपास का उपयोग करना संभव होता है।

कॉम्पैक्ट स्पिनिंग  की सीमाएं:

कॉम्पैक्ट स्पिनिंग  की एक सीमा यह भी होती  है कि पारंपरिक रिंग स्पिनिंग से कॉम्पैक्ट सिस्टम में पुनर्वास के लिए अधिक निवेश की आवश्यकता होती है।

महत्वपूर्ण बात यह है कि कम बालों के झड़ने के नकारात्मक प्रभाव के बारे में चिंताएं हैं।

· एक अध्ययन में बताया गया है कि बालों के कम होने से ट्रैवेलर्स  में बार-बार बदलाव आ सकता है, क्योंकि धागे के बॉडी  से निकलने वाले बाल ट्रैवेलर्स को चिकनाई और ठंडक प्रदान करते हैं और इस तरह ट्रैवेलर्स के पहनावे को कम करते हैं।

यह मुद्दा कॉम्पैक्ट रिंग स्पिनिंग प्रक्रिया के अर्थशास्त्र पर सवाल उठाता है।

एक अध्ययन से पता चलता है कि यह केवल लंबे (कोम्ब्ड) फाइवर्स  के लिए प्रभावी होती है (कैम्पेन, 2000)।

Saturday, October 15, 2022

Objectives of compact spinning system, different types of compact spinning systems advantages and limitations

 

Compact spinning system:

 

Why does compact spinning technology require in the ring spinning process?

·  The main reason  of the fibres migration in the conventional ring spinning process is the tension difference between fibres during the yarn formation.

·   When the twist is inserted into the ribbon like fibres bundle and the yarn formation takes place. 

·The fibres at the edges of the fibres bundle face  with tension  and  the fibres in the middle of the fibres bundle are subjected to compression unless there is excessive yarn tension.

· To release the stress, fibres subjected to tension try to shorten their path length in the yarn while fibres under compression try to lengthen it.

· As a result of this, fibres leave their perfect helical path and migrate between layers of the yarn.

·   In the other words, a long spinning triangle results in a longer weak point, and thus more end breaks in the at ring frame.

·   However, with a long triangle, fibres are better bound into the yarn.

Objectives of compact spinning:

· The main objective of the compact spinning is to eliminate the spinning triangle because  the fibres migration problems is  associated with the size of the spinning triangle being formed in the conventional ring spinning process.

 

·The tension difference among fibres during twist insertion is small  in ring spinning equipped with compact spinning system due to the almost  elimination of the spinning triangle.

·Therefore fibre migration in compact yarns could be expected to be less than that in conventional ring spun yarns.

· Klein has found out that a short spinning triangle represents a short weak point and thus fewer end breaks.

·If the spinning triangle is too short and the deflection of the fibres on the edges has to be very sharp during the binding-in.

·       This is not possible with all fibres. Therefore a very short spinning triangle results in some fibres on the edge not to be integrated into the yarn, resulting in loose fibres or ‘fly’.

·  Other fibres on the edge might be bound-in at one end only, causing hairiness.


·Compact spinning produces a smoother yarn and less fly.



Different types of compact spinning devices:

There are mainly three kinds of compact spinning devices which are described as below:

Suessen EliTe compact spinning system:

·This system consists of an additional ‘drafting zone which is mounted on a standard three-roll ring spinning machine.

·An air-permeable lattice apron runs over a suction tube in this drafting zone .

·The suction tube is under negative pressure and there is a slot tilted in the direction of fibres movement for each spinning position.

·   When the fibres leave the front roller nip line, the lattice aprons guides the fibres over the openings of the suction slots. 

·The fibres move sideways and condense due to suction air flow.

·The openings of the suction slots get inclined to the direction of fibres flow.

·These suction slots inclination help to condensing by generating a transverse force on the fibres band during their transport over the slot, causing the fibre band to rotate around its own axis.

·The lattice apron carries the fibres attached to it up to the delivery nip line.

·The diameter of the delivery (driven) top roller is kept slightly bigger than the diameter of the front bottom (driving) roller.

·The difference of diameter between delivery top roller the front bottom roller generates a tension in the longitudinal direction during the condensing process.

·The tension ensures the straightening of curved fibres, and therefore supports the condensing effect of the negative pressure.


Rieter K44 ‘ComforSpin’ compact spinning system:

·The compact spinning concept illustrated in the figure  is the one represented by the Rieter ‘ComforSpin’ process.

·Aerodynamic forces are used to laterally condense the drafted fibres ribbon after the main drafting zone in this system.

·As a result of the aerodynamic forces, the spinning triangle becomes so small or  it gets  almost eliminated.

·The Rieter K44 ComforSpin machine consists of a three-roller, double-apron drafting system.

·The exit zone of this system is modified to allow fibre condensation. 

·The exit roller is replaced by a perforated drum (1), within which is a stationary suction unit that is connected to the machine’s central extraction unit (2). 

·The fibres delivered by the exit nip line of the drafting system are held on the surface of the perforated drum, moving at the drum’s peripheral speed.

·In this way, the ComforSpin technology allows aerodynamic parallelization and condensation of the fibres after the main draft.

·The spinning triangle is reduced to a minimum in this compact spinning system.

·The compacting zone is the heart of the machine which consists of the perforated drum, suction insert, and air guide element.

·The positively driven perforated drum gets hard-wearing and resistant to fibres clinging.

·There  is an exchangeable stationary suction insert with a specially shaped slot inside each drum.

·This drum gets connected to the suction system of the machine.

·The air current created by the vacuum generated in the perforated drum condenses the fibres after the main draft.

·The fibres are fully controlled all the way from the nip line after the drafting zone to the spinning triangle.

·An additional nip roller prevents the twist from being propagated into the condensing zone.

·       The compacting efficiency in the condensing zone is enhanced by a specially designed and patented air guide element.

Zinser AIR-COM-TEX 700® compact spinning system: 

·This system  also works on the basis of eliminating the spinning triangle.

·The conventional three cylinder drafting system is used in this technology.

·The fibres emerge from the drafting system and get condensed under suction onto the surface of a perforated belt.

·The condensed fibre strand undergoes a substantial reduction in width prior to twisting.

·This reduction in the difference between the width of the fibres emerging from the drafting system and the yarn diameter effectively eliminates the spinning triangle.

·The compacting zone can be adapted to the raw materials by the adjustability of the additional feed, because the compacting zone between the two front cylinders can be influenced by a lower speed of the perforated apron with maximum –4.0%. For the cotton compact spinning process, from 0 to 4% additional feed is required from a technological point of view.

· The machine can be optimally set to the most fibres with this spectrum .

·This has a positive influence on the position of the individual fibres, since only unstressed and parallelised fibres can be deflected and compacted.

Advantages of compact spinning:

·The reduced hairiness level.

·Ability to produce yarns of enhanced strength.

·Improved elongation at break even with lower twist levels.

·Softer feel due to low twist.

·The compact spinning process produces a new ring-yarn structure which is close to the idealized staple fibre yarn construction.

·Better fabric appearance

· Improved performance in weaving stage.   

·better utilization of the raw material.

· Higher delivery rates can be achieved.    

· Cost savings in the downstream processing stages.

· Improves machine efficiency due to low end breakages rate.

·It is therefore possible to use low quality cotton while maintaining yarn strength equal to that of conventional ring spun yarn with the same twist level.

Limitations of compact spinning:

·The only limitation of compact spinning is that the rehabilitation from conventional ring spinning to the compact system needs more investment.

·Importantly, there are concerns about the negative influence of the low hairiness.

·A study pointed out that the reduced hairiness might lead to more frequent traveler change, since hairs protruding from the yarn body provide lubrication and a cooling effect on the traveler and thus reduce traveler wear.

·This issue questions the economics of the compact ring spinning process.

·A study shows that it is effective only for longer (or combed) fibres (Kampen, 2000).


Sunday, October 9, 2022

कॉम्बिंग मशीन की कार्य प्रक्रिया और फीड स्टॉक तैयार करने की विधि(WORKING PROCEDURE OF COMBING MACHINE AND FEED STOCK PREPARATION METHOD)

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WORKING PROCEDURE OF COMBING MACHINE AND FEED STOCK PREPARATION METHOD

कॉम्बिंग मशीन की कार्य प्रक्रिया और फीड स्टॉक तैयार करने की विधि 


कॉम्बिंग मशीन की कार्य प्रक्रिया:

कॉम्बिंग मशीन की कार्य प्रक्रिया को निम्नलिखित चरणों में समझा जा सकता है:

• सबसे पहले लैप रोलर को रोलर स्टैंड पर लगाया जाता है।

• लैप फीड सबसे पहले फीड रोलर के नीचे से गुजरती है। फीड रोलर लैप शीट को 4.3 - 6.7 मिमी की थोड़ी मात्रा से आगे बढ़ाने में मदद करता है। जब लैप शीट आगे बढ़ती है तो निपर्स खुल जाते हैं और फ़ीड प्राप्त करने के लिए तैयार हो जाते हैं।

• जैसे ही फीडिंग क्रिया पूरी हो जाती है, ऊपरी निपर  प्लेट नीचे की निपर  प्लेट की और  नीचे की तरफ आने लगती है। ये निपर  प्लेट्स कॉम्बिंग एक्शन के दौरान लैप शीट को मजबूती से पकड़ने में मदद करती हैं।

• अब कॉम्बिंग प्रोसेस  शुरू होती   है। लैप शीट घूर्णन सिलेंडर पर लगे नीचे की कंघी के संपर्क में आती है। कंघी के आरी दांत लैप शीट को स्वीप करते हैं। यह उस सामग्री को दूर ले जाता है जो निपर  प्लेट्स द्वारा पकड़ी नहीं जाती है।

• निपर  प्लेट्स फिर से खुल जाती हैं और डिटैचिंग रोलर्स की ओर बढ़ जाती हैं, इस बीच, डिटैचिंग रोलर्स ने पहले से निकाले गए स्टॉक (वेब) के हिस्से को रिवर्स रोटेशन के माध्यम से वापस कर दिया है ताकि वेब डिटेचिंग डिवाइस (वेब ​​रिटर्न) के पीछे से बाहर निकल जाए। ) निपर्स के आगे बढ़ने के दौरान, प्रोजेक्टिंग फाइबर फ्रिंज को लौटे वेब (पीसिंग) पर रखा जाता है।

• डिटैचिंग रोलर्स फिर से आगे की दिशा में घूमने लगते हैं और ग्रिप्ड फाइबर्स को फीड रोलर्स द्वारा तेजी से पकड़े हुए वेब से बाहर निकालते हैं।

• अब ऊपरी कंघी काम में आती है और रेशों के फ्रिंज के पीछे वाले हिस्से को कंघी करती है।

• डिटैचिंग रोलर्स काम करते हैं और अगली फीडिंग प्राप्त करने के लिए निपर्स  प्लेट्स फिर से खुल जाती हैं। ऊपरी कंघी वापस अपनी निष्क्रिय स्थिति में चली जाती है और एक नया कॉम्बिंग  चक्र शुरू हो जाता है

• ब्रश सिलेंडर नीचे की कंघी से अशुद्धियों को दूर अलग हटाने  में मदद करता है और उन्हें एक एक्स्ट्रेक्टर में निकाल देता है जो नोइल को एकत्रित फिल्टर सिस्टम तक ले जाता है।

• ये सभी यांत्रिक रूप से अत्यधिक मांग वाले प्रसंस्करण कदम 8 कॉम्बिंग हेड्स  (रिटर की वर्तमान ई 66 कॉम्बर पीढ़ी ) पर एक साथ 500 बार प्रति मिनट की गति से किए जाते हैं।

कॉम्बिंग  स्टॉक की तैयारी:

कार्डेड स्लाइवर के  रूप और फाइबर की व्यवस्था के कारण इसका  सीधे कॉम्बिंग प्रक्रिया में उपयोग नहीं किया जा सकता है । यदि कार्डेड स्लाइवर कोम्बर को फीड किया  जाता है, तो निपर  प्लेट स्लाइवरर के केवल उच्च बिंदुओं को पकड़ती है। स्लाइवर के कम मजबूती से संकुचित किनारे वाले क्षेत्रों के अनुचित तरीके से निपर्स द्वारा पकड़े जाने  का जोखिम हमेशा बना रहता है। जब कॉम्बिंग  की क्रिया होती है, तो इन तंतुओं को नीचे की कंघी (सिलेंडर कंघी) द्वारा गुच्छों के रूप में बाहर निकाला जाता है।

इस समस्या के लिए कॉम्बिंग मशीन को फीड के रूप में एकरूपता की उच्चतम संभव डिग्री के साथ एक सूती लैप  की आवश्यकता होती है। फ़ीड सामग्री को सर्वोत्तम फाइबर व्यवस्था (फ़ीड सामग्री की लंबाई के समानांतर फाइबर) की आवश्यकता होती है। यदि फ़ीड सामग्री में फाइबर की व्यवस्था उचित नहीं है, तो लंबे स्टेपल फाइबर का अनावश्यक नुकसान भी होता है। इसलिए फाइबर की सबसे अच्छी समानांतर व्यवस्था के साथ उच्च स्तर की एकरूपता वाली फाइबर शीट का उपयोग कंघी प्रक्रिया में फीडस्टॉक के रूप में किया जाता है।

फीड तैयारी के तरीके:

एक मशीन जिसमें तीन जोड़ी ड्राफ्टिंग रोलर्स और दो जोड़ी कैलेंडर रोल होते हैं, का उपयोग कॉम्बिंग मशीन के लिए उपयुक्त लैप बनाने के लिए किया जाता है।

स्लाइवर लैप/रिबन लैप तैयार करने की पारंपरिक विधि में, सोलह से बत्तीस कार्डेड स्लाइवर को लैप तैयारी मशीन में एक साथ फीड किया जाता है। यह मशीन 50 - 70 ग्राम प्रति मीटर रेखिक घनत्व और 230 - 300  मिमी की चौड़ाई वाली  एक लैप  बनाती है। इस लैप को लैप रोल पर लपेटा जाता है। लैप रोल का व्यास लगभग 500 मिमी होता है। और इसका वजन 27.0 किलो तक होता है। स्लाइवर लैप मशीन में 1.5 से 2.5 के ड्राफ्ट का उपयोग किया जाता है।


अब, इन तैयार स्लाइवर लैप्स को "रिबन लैप मशीन" से गुजारा जाता है। आम तौर पर रिबन लैप मशीन में चार हेड होते हैं। प्रत्येक हेड  एक स्लाइवर लैप  को संसाधित करता है। प्रत्येक पतली शीट को एक घुमावदार प्लेट के ऊपर नीचे की ओर ले जाया जाता है। सभी चार पतली चादरें एक साथ नीचे की ओर जाती हैं। यह समकोण पर मुड़ता है, उन्हें उलट देता है और एक को दूसरे पर आरोपित करता है। "रिबन लैपर में इस्तेमाल किया गया  ड्राफ्ट लगभग चार होता हैं, इसलिए रिबन लैप का वजन प्रति मीटर स्लाइवर लैप के समान होता  है"।

सुपर लैप तैयारी मशीन:

 इस मशीन में 2/3 वर्टिकल ड्राफ्टिंग सिस्टम होते हैं। इस मशीन में लगभग 20 ड्राइंग स्लाइवर फीड किए जाते हैं। फीड सामग्री को तीन से पांच गुना ड्राफ्ट किया  जाता है। इस प्रकार की तीन इकाइयाँ ड्रान स्लाइवर को रेशों की तीन पतली चादरों में बदल देती हैं। इन चादरों को एक के ऊपर एक आरोपित किया जाता है। कलेंडर रोल अंतिम लैप शीट को दबाते हैं।

इस मशीन का उपयोग केवल अतिरिक्त-लंबे स्टेपल फाइबर से बहुत महीन सूत के निर्माण में किया जाता है।

ब्रेकर ड्राइंग/लैप बनाने की विधि:

अधिकांश कॉम्बिंग  प्रोसेस  के लिए ब्रेकर ड्राइंग/लैप-फॉर्मिंग विधि बहुत आम होती है। लैप तैयारी की यह विधि फाइबर की लंबाई को मध्यम से लंबी-स्टेपल फाइबर तक संसाधित करने के लिए उपयोगी होती है। इस विधि में लैप  तैयार करने की पूरी प्रक्रिया दो चरणों में पूरी होती है:

ड्राइंग प्रक्रिया:

लैप  तैयार करने की इस पद्धति में एक मानक ड्राइंग प्रक्रिया का उपयोग किया जाता है। 20 - 24 कार्डेड स्लाइवर को एक साथ फीड किया  जाता है। इन सारे स्लाइवर को ड्राफ्टिंग करने के बाद एक फाइबर की शीट प्राप्त होती है |

लैप वाइंडिंग  प्रक्रिया:

  अब, यह ड्राफ्ट की  गई फाइबर शीट लैप रोलर पर लपेट   दी जाती  है। लैप  का रैखिक घनत्व 50 से 70 ग्राम प्रति मीटर . के बीच भिन्न होता है

विभिन्न प्रकार की कॉम्बिंग मशीन्स, कॉम्बिंग मशीन की सामान्य संरचना(TYPES OF COMBING MACHINES, COMMON STRUCTURE OF COMBING MACHINE)

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TYPES OF COMBING MACHINES, COMMON STRUCTURE OF COMBING MACHINE

कॉम्बिंग मशीन के प्रकार, कॉम्बिंग मशीन की सामान्य संरचना


विभिन्न प्रकार की कॉम्बिंग मशीन्स:

विभिन्न कपड़ा उद्योगों में निम्नलिखित प्रकार की कॉम्बिंग  मशीनों का उपयोग किया जाता है:

• रेक्टिलिनियर कॉम्बर मशीन।

• सर्कुलर कंबर मशीन।

• रोटरी कॉम्बर मशीन।

• हैकिंग मशीन।

कॉम्बिंग मशीन की सामान्य संरचना:

कॉम्बिंग मशीन में उपयोग की जाने वाली सामान्य तंत्र की इकाइयाँ नीचे दी गई हैं:

• फीडिंग  प्रणाली।

• निपर  प्लेट।

• कॉम्बिंग  प्रणाली।

• डिटैचिंग रोलर्स सिस्टम।

• अपशिष्ट हटाने की व्यवस्था।

1 - फीडिंग  प्रणाली:

फीडिंग सिस्टम में फीड प्लेट और फीड रोल होते हैं। "फीडिंग एलिमेंट  का मुख्य कार्य छोटी लंबाई की श्रृंखला में कोम्बर लैप  को फीड करना  है"। इसमें दो प्रकार की फीडिंग प्रणालियों का उपयोग किया जाता है:

फॉरवर्ड फ़ीड:

इस प्रकार की फीडिंग प्रणाली में लैप शीट फीडिंग होती है जबकि निपर  प्लेट्स कोम्बर मशीन के डिटैचिंग रोल की ओर हट जाती है। इस प्रकार के फीडिंग सिस्टम को फॉरवर्ड फीडिंग सिस्टम भी कहा जाता है।

काउंटर-फ़ीड:

इस प्रकार की फीडिंग प्रणाली में लैप शीट फीडिंग होती है जबकि निपर  प्लेट्स अपनी पिछली स्थिति में लौट आती हैं।

2 - निपर प्लेट्स:

नीचे की निपर  प्लेटें रेशों को पकड़ती हैं। जब कपास में मौजूद छोटे रेशे, नेप्स और कचरा हटा दिया जाता है, तो निपर  प्लेट्स सामान्य लंबाई और लंबे-स्टेपल फाइबर ग्रिप करती हैं।

3 - कॉम्बिंग  प्रणाली:

कॉम्बिंग सिस्टम कॉटन शीट पर कॉम्बिंग एक्शन करता है। कॉम्बिंग  की क्रिया कपास में मौजूद छोटे रेशों, नेप्स और कचरे को खत्म करने में मदद करती है। यह स्लाइवर  में तंतुओं की समानांतर व्यवस्था को अनुकूलित करने में भी मदद करता है।

कॉम्बिंग मशीन में दो तरह की कंघी का इस्तेमाल होता है

मुख्य या प्राथमिक कंघी

पहली एक घूर्णन तली गोलाकार कंघी है। यह लैप शीट में मुख्य कॉम्बिंग क्रिया करता है।

माध्यमिक कंघी:

दूसरा एक रैखिक शीर्ष कंघी है। यह नीचे की कंघी के कार्य को ऊर्ध्वाधर कॉम्बिंग मूवमेंट के माध्यम से पूरा करता है।

4 - डिटेचिंग  रोलर्स सिस्टम:

डिटैचिंग रोल्स ग्रिपिंग रोल के दो जोड़े होते हैं जो नेट फॉरवर्ड यात्रा के लिए कोम्ब्ड वेब को पकड़ने और स्थानांतरित करने के लिए रुक-रुक कर आगे और पीछे की दिशाओं में घूमते हैं।

Saturday, October 8, 2022

कॉम्बिंग प्रक्रिया (एक स्पिनिंग प्रक्रिया), COMBING PROCESS ( A SPINNING PROCESS)

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COMBING PROCESS ( A SPINNING PROCESS)

कॉम्बिंग  प्रक्रिया (एक स्पिनिंग प्रक्रिया)

"कॉम्बिंग  एक ऐसी प्रक्रिया है जो स्लाइवर  से छोटे तंतुओं, अशुद्धियों, नेप्स , अपरिपक्व तंतुओं को बाहर निकाल   देती  है, तंतुओं को सीधा करती है और उन्हें स्लाइवर की लंबाई के समानांतर बनाती है।" यार्न निर्माण प्रक्रिया में कॉम्बिंग  की प्रक्रिया का विशेष महत्व होता है। कॉम्बिंग  की प्रक्रिया यार्न को अतिरिक्त गुणवत्ता लाभ प्रदान करती है। बहुत अधिक यार्न शक्ति, उच्च स्तर की समरूपता, कम हैरिनेस , कम नेप्स % और यार्न में अपरिपक्व फाइबर का सबसे कम प्रतिशत कॉम्बिंग  प्रक्रिया के बाद होता है। सूत की उच्च गुणवत्ता प्राप्त करने के लिए कॉम्बिंग  करना अनिवार्य होता है। कोम्ब्ड यार्न कार्डेड यार्न की तुलना में अधिक चमकदार दिखता है। कॉम्बिंग  की प्रक्रिया यार्न की लागत को भी प्रभावित करती है। कॉम्बिंग  की प्रक्रिया के बाद यार्न की निर्माण लागत लगभग 10-15% बढ़ जाती है। कॉम्बिंग  की प्रक्रिया का उपयोग आमतौर पर केवल सूती धागे के निर्माण में किया जाता है। कोम्ब्ड यार्न का उपयोग सूटिंग, शर्टिंग, ट्राउजर, तौलिये आदि जैसे कपड़ों के निर्माण के लिए किया जाता है। चूंकि कॉम्बिंग  की प्रक्रिया स्लाइवर से छोटे तंतुओं को समाप्त कर देती है जिससे कि कॉम्बिंग  की प्रक्रिया के बाद बड़ी मात्रा में अपशिष्ट निकलता है। संसाधित होने वाली सामग्री के आधार पर फाइबर का लगभग 12 - 25% अपव्यय होता है। इस अपव्यय का उपयोग मोटे धागों की कताई में किया जाता है।

कॉम्बिंग  प्रक्रिया के उद्देश्य:

कॉम्बिंग  प्रक्रिया के मुख्य उद्देश्य नीचे दिए गए हैं:


कॉम्बिंग प्रक्रिया के प्राथमिक उद्देश्य:

• स्लाइवर में मौजूद छोटे रेशों को हटाना ।

• रेशों को सीधा करना ।

• रेशों को स्लाइवर की लंबाई के साथ अधिकतम समानांतर करना ।

• स्लाइवर की एकरूपता में सुधार करना ।

कॉम्बिंग  प्रक्रिया के माध्यमिक उद्देश्य:

• रुई में मौजूद गंदगी और धूल को खत्म करना ।

• कपास की  अधिकतम सफाई करना ।

• टूटे हुए बीज और नेप्स  जैसी बाहरी  अशुद्धियों से स्लाइवर को मुक्त करना ।

• स्लाइवर में मौजूद अपरिपक्व रेशों को हटाना ।

• सूत की दृश्य अपीयरेंस  में सुधार करना ।

• सूत की तन्य शक्ति को अधिकतम बढ़ाना ।

• सूत की चमक और चिकनाई में सुधार करना ।

• सूत के स्पर्श और फील  को बेहतर करना ।

बुने हुए कपड़े की फटने की ताकत( बर्स्टिंग स्ट्रेंथ), बुने हुए कपड़े के गुण(BURSTING STRENGTH OF WOVEN FABRIC, PROPERTIES OF WOVEN FABRIC)

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BURSTING STRENGTH OF WOVEN FABRIC, PROPERTIES OF WOVEN FABRIC


 बुने हुए कपड़े की फटने की ताकत( बर्स्टिंग स्ट्रेंथ), बुने हुए कपड़े के गुण


 कपड़ा फटने की ताकत: 

जब कपड़े पर दबाव पड़ता है, तो कपड़े एक ही समय में सभी संभावित दिशाओं में फैलने लगते हैं। जब लागू दबाव धीरे-धीरे बढ़ता है, तो दबाव सीमा के बाद कपड़े फटने लगते हैं। इस दबाव सीमा को फटने की ताकत कहा जाता है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि "कपड़े की सतह को फटने के लिए आवश्यक दबाव को कपड़े की फटने की शक्ति कहा जाता है"। इसे पाउंड (एलबीएस) प्रति वर्ग इंच  या किलोग्राम प्रति वर्ग  सेंटीमीटर में मापा जाता है।

 पैराशूट कपड़े के लिए कपड़े की फटने की ताकत बहुत महत्वपूर्ण गुण होता  है। कपड़े में प्रयुक्त धागे और सामग्री का प्रकार, कपड़े की थ्रेड काउंट  और कंस्ट्रक्शन  कपड़े की फटने की ताकत को बहुत प्रभावित करता है। सिंथेटिक यार्न से बुने गए कपड़े में प्राकृतिक यार्न की तुलना में अधिक फटने की ताकत होती है।

बुने हुए कपड़े को फाड़ने की ताकत (टेयरिंग स्ट्रेंथ), बुने हुए कपड़े का एक गुण (TEARING STRENGTH OF WOVEN FABRIC, FABRIC PROPERTIES OF WOVEN FABRIC)

 बुने हुए कपड़े को फाड़ने की  ताकत (टेयरिंग स्ट्रेंथ), बुने हुए कपड़े का एक  गुण


कपड़े को फाड़ने  की  ताकत( टेयरिंग स्ट्रेंथ): 

कपड़े को फाड़ने की  ताकत वह बल होता है जो कपड़े को फाड़ने की शुरुआत करता है। "नमूने के केंद्र में एक विभाजन से कपड़े को फाड़ने या कपड़े का  फटना  जारी रखने के लिए आवश्यक फाड़ बल" को कपड़े की फाड़ शक्ति ( टेयरिंग स्ट्रेंथ) कहा जाता है। इसे फाड़ प्रतिरोध भी कहा जाता है। इसे पाउंड, ग्राम, किलोग्राम या न्यूटन आदि में मापा जाता है। यह ताना और बाने की दिशा के लिए अलग से निर्धारित किया जाता है। फाड़ शक्ति को प्रभावित करने वाले कारक नीचे दिए गए  हैं:

 कपड़े में प्रयुक्त सामग्री का प्रकार: 

कपड़े में प्रयुक्त सामग्री कपड़े की फाड़ शक्ति को बहुत प्रभावित करती है। सिंथेटिक यार्न से बने कपड़े में प्राकृतिक यार्न से बने कपड़े की तुलना में बेहतर फाड़ ताकत होती है। निरंतर फिलामेंट यार्न से बने कपड़े में स्पन यार्न की तुलना में अधिक फाड़  शक्ति होती है। महीन और लंबे स्टेपल रेशों से बने कपड़े में मोटे और छोटे स्टेपल रेशों की तुलना में बेहतर फाड़ ताकत होती है।

यार्न की काउंट  और कपड़े का कंस्ट्रक्शन: 

कपड़े में इस्तेमाल होने वाले यार्न की काउंट , प्रति इंच एंड्स  और प्रति इंच पिक्स को फाड़ ताकत के साथ बहुत सम्वन्ध होता  है। इसे कुछ उदाहरणों से समझा जा सकता है:

ए और बी दो फैब्रिक हैं, दोनों फैब्रिक का जीएसएम समान है। फैब्रिक ए मोटे काउंट यार्न से बना है और फैब्रिक बी फाइन काउंट यार्न से बना है। इस मामले में, कपड़े ए की फाड़ ताकत बी से अधिक होगी।

यदि कपड़े A और B एक ही एक ही यार्न काउंट  के बने हैं और कपड़े A में B की तुलना में प्रति वर्ग इंच अधिक धागे हैं। इस स्थिति में, कपड़ा A, B की तुलना में बेहतर फाड़ ताकत देगा।

यार्न ट्विस्ट: 

कपड़े का यार्न ट्विस्ट कुछ हद तक फाड़ने की ताकत को प्रभावित करता है। कपड़े में उच्च ट्विस्ट यार्न के परिणामस्वरूप बेहतर फाड़ शक्ति के रूप में परिणाम होता है।

Friday, October 7, 2022

बुने हुए कपड़े की तन्यता ताकत( टेंसाइल स्ट्रेंथ), बुने हुए कपड़े के गुण(TENSILE STRENGTH OF WOVEN FABRIC, FABRIC STRENGTH, PROPERTIES OF WOVEN FABRIC)

 बुने हुए कपड़े की तन्यता ताकत( टेंसाइल स्ट्रेंथ), बुने हुए कपड़े के गुण


कपड़े की तन्यता ताकत ( टेंसाइल स्ट्रेंथ)

जब कपड़े पर खिंचाव बल (भार) लगाया जाता है, तो वह एलॉन्गशन बढ़ने  लगता है। खिंचाव बल (भार) धीरे-धीरे बढ़ता है, तो साथ साथ एलॉन्गशन  भी बढ़ता जाता  है, जब खिंचाव बल की मात्रा एक निश्चित बिंदु पर पहुँचती है, तो कपड़ा टूटने लगता है। अब हम कह सकते हैं कि फैब्रिक की टेन्साइल स्ट्रेंथ स्ट्रेचिंग फोर्स (लोड) की वह मात्रा होती है जिस पर स्ट्रेचिंग की स्थिति में आने पर फैब्रिक टूटने लगता है। इसे न्यूटन प्रति वर्ग सेंटीमीटर या पाउंड प्रति वर्ग इंच में मापा जाता है। यह धागे की ताकत, सामग्री के प्रकार या कपड़े के प्रति वर्ग इंच के धागे की गिनती आदि पर निर्भर करता है। कपड़े की तन्यता ताकत ताना और बाने की दिशा में अलग-अलग निर्धारित की जाती है।

सिंथेटिक कपड़ों में प्राकृतिक कपड़ों की तुलना में बेहतर तन्यता ताकत होती है।

महीन और लंबे स्टेपल रेशों से बने कपड़े में मोटे और छोटे रेशों की तुलना में अधिक तन्यता ताकत होती है।

यदि दो कपड़ों की ताना और बाने की संख्या समान है, तो प्रति वर्ग इंच में अधिक धागे वाले कपड़े उच्च तन्यता ताकत देंगे।

ड्रा फ्रेम प्रक्रिया में सावधानियां (PRECAUTIONS OF DRAW FRAME PROCESS)


ड्रा फ्रेम प्रक्रिया में सावधानियां:

सावधानी वरतना हमेशा इलाज से बेहतर होता  है। सावधानियां हमेशा हर प्रक्रिया में उत्पाद की उत्पादकता और गुणवत्ता को अधिकतम करने में मदद करती हैं। यदि हम किसी प्रक्रिया के दौरान सावधानी बरतते हैं तो अस्वीकृति प्रतिशत ऑफ़ आउटपुट न्यूनतम स्तर तक कम हो जाता है। ड्रा फ्रेम प्रक्रिया में वरती जाने वाली सावधानियां   निम्नलिखित होती  हैं:

• बेहतर फाइबर समानांतरकरण के परिणामस्वरूप आमतौर पर अधिक समान सूत और कताई में धागा  टूटने की दर कम  होती है।

• व्यापक बैक रोलर सेटिंग यार्न की ताकत, यार्न की समरूपता को प्रभावित करती है और इसके परिणाम स्वरुप  खामियों में वृद्धि होती है।

• व्यापक फ्रंट रोलर सेटिंग यार्न की ताकत में सुधार करती है।

• उच्च शीर्ष रोलर (बैक) लोडिंग यार्न की ताकत और एन्ड  टूटने की दर को कम करता है।

• उच्च ड्राफ्ट स्लाइडर में फाइबर व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद करता है और फाइबर को स्लाइवर की लंबाई के साथ अधिक समानांतर बनाता है। लेकिन स्लाइवर की समता कम हो जाती है।

• ड्रा फ्रेम  को फीड होने वाला  स्लाइवर का वजन जितना अधिक होगा, यार्न की ताकत, यार्न की समरूपता कम होगी, और यार्न में उच्च अपूर्णताएं भी पैदा  करता  है और रिंग कताई में धागा  टूटना अधिक होता है।

• समय के साथ त्वरण बिंदु की अस्थिरता के कारण अनियमितताएं उत्पन्न होती हैं। एप्रन और रोलर्स का उपयोग ड्राफ्टिंग ज़ोन में फाइबर को बैक रोलर वेग पर रखने के लिए किया जाता है, जब तक कि अग्रणी सिरे को फ्रंट रोलर द्वारा मजबूती से पकड़ नहीं लिया जाता है, लेकिन इंडिविजुअल  फाइबर नियंत्रण प्राप्त नहीं होता है।

• ड्राफ्टिंग वेव  मुख्य रूप से यांत्रिक दोषों के कारण नहीं होती है, बल्कि दोषों के परिणामस्वरूप पीरियाडिक  प्रकार के अनियंत्रित फाइबर मूवमेंट  के कारण होती है जैसे-जैसे फाइबर-त्वरक बिंदु चलता है।

• कॉइलर की गति सही ढंग से चुनी जाती  है। कॉइलर की गति को सही ढंग से सेट करने के लिए पर्याप्त सावधानी बरती जाती है।

• सुधार का समय ऑटो लेवलर की प्रतिक्रिया का समय है जब यह सुधार बिंदु तक पहुंचने पर भिन्नता को करेक्ट  करने के लिए कार्य करता है।

• चूंकि विस्तृत स्लाइवर फ़नल का आकार स्लाइवर के असमानता प्रतिशत को प्रभावित करता है, इसलिए इसे ठीक से चुना जाता है। लेकिन छोटे फ़नल आकार के परिणामस्वरूप सामने की ओर अधिक स्लाइवर टूट जाते हैं।

• फाइबर स्कम  को 8 घंटे की शिफ्ट में कम से कम एक बार ऊपर के रोलर से गीले कपड़े की मदद से हटा दिया जाता है। जबकि 100% पॉलिएस्टर का प्रसंस्करण किया जा रहा है।

• ड्रॉ फ्रेम विभाग की सापेक्ष आर्द्रता स्लाइवर के रैखिक घनत्व के विश्लेषण में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ड्रॉ फ्रेम ड्राफ्ट में अवांछित परिवर्तन से बचने के लिए स्लाइवर की प्रति यूनिट लंबाई वजन की गणना के दौरान संबंधित सुधार किया जाता है।

• जब बैक रोलर सेटिंग, गाइड रेल सेटिंग, डिलीवरी स्पीड, ब्रेक ड्राफ्ट में बदलाव किए जाते हैं, तो ऑटो लेवलर में सुधार के समय को भी बदलना होता है।

बुने हुए कपड़े का एलॉन्गशन, बुने हुए कपड़े के गुण (ELONGATION OF WOVEN FABRIC, WOVEN FABRIC ELONGATION, PROPERTIES OF WOVEN FABRIC)

 बुने हुए कपड़े का एलॉन्गशन,  बुने हुए कपड़े के गुण


फैब्रिक एलॉन्गशन:

 कपड़े की लंबाई या चौड़ाई में परिवर्तन को तोड़ने वाले बल पर प्रतिशत के रूप में व्यक्त किया जाता है, इसे एलॉन्गशन कहा जाता है। फैब्रिक एलॉन्गशन को प्रभावित करने वाले कारक नीचे दिए गए हैं:

कपड़े में प्रयुक्त सामग्री: 

कपड़े में प्रयुक्त सामग्री का प्रकार कपड़े को बहुत प्रभावित करता है। सिंथेटिक रेशों से बुने गए कपड़े में प्राकृतिक रेशों की तुलना में अधिक एलॉन्गशन प्रतिशत होता है। मोटे और छोटे स्टेपल फाइबर से बुना हुआ कपड़ा महीन और लंबे स्टेपल फाइबर की तुलना में खराब एलॉन्गशन को दर्शाता है।

फैब्रिक वीव : 

कपड़े की वीव  कुछ हद तक कपड़े के एलॉन्गशन को प्रभावित करती है। प्लेन वीव  वाले कपड़े में साटन या टवील बुनाई की तुलना में अधिक एलॉन्गशन होता  है। यह सिर्फ कपड़े में मौजूद ताना क्रिम्प या वेफ्ट क्रिम्प के कारण होता है। यदि फैब्रिक में इंटरलेसिंग की संख्या अधिक होगी तो फैब्रिक में एलॉन्गशन भी अधिक होगा ।

यार्न ट्विस्ट:

 यार्न के ट्विस्ट की मात्रा नभी  कपड़े एलॉन्गशन को कुछ हद तक प्रभावित करीत  है। हाई ट्विस्ट यार्न से बुने हुए फैब्रिक लो ट्विस्ट यार्न की तुलना में अधिक एलॉन्गशन वाले होते हैं। यह ट्विस्ट इंसर्शन के  समय सूत के संकुचन के कारण होता है। जब यार्न ब्रेकिंग लोड की स्थिति में आता है, तो इस संकुचन के कारण यार्न का एलॉन्गशन होता है। चूंकि हम जानते हैं कि ट्विस्ट की मात्रा यार्न में रेशों को पकड़ने में मदद करती है, इसलिए उच्च ट्विस्टेड यार्न में कम ट्विस्टेड यार्न की तुलना में अधिक तन्यता ताकत होती है। यह अतिरिक्त मात्रा में ट्विस्ट  फाइबर की फिसलन को रोकने में मदद करता है जबकि कपड़े को एलोंगेट किया जा रहा है।

यार्न काउंट  और कंस्ट्रक्शन: 

महीन धागे से बुने हुए कपड़े मोटे धागे की तुलना में अधिक एलॉन्गशनदेते हैं। प्रति वर्ग इंच धागे की संख्या भी एलॉन्गशन प्रतिशत को प्रभावित करती है। उच्च थ्रेड काउंट फैब्रिक कम थ्रेड काउंट फैब्रिक की तुलना में अधिक बढ़ाव वाला होता है।

बुने हुए कपड़े की आयामी स्थिरता( डायमेंशनल स्टेबिलिटी), बुने हुए कपड़े के गुण (DIMENSIONAL STABILITY OF WOVEN FABRIC , PROPERTIES OF WOVEN FABRIC)

 बुने हुए कपड़े की आयामी स्थिरता( डायमेंशनल स्टेबिलिटी), बुने हुए कपड़े के गुण


आयामी स्थिरता(डायमेंशनल स्टेबिलिटी):

एक कपड़े की आयामी स्थिरता अपने आवश्यक उद्देश्यों (रंगाई, परिष्करण, धुलाई या किसी अन्य प्रक्रिया) के लिए उपयोग किए जाने के दौरान कपड़े के मूल आयाम या आकार को बनाए रखने की क्षमता होती  है। किसी भी परिष्करण प्रक्रिया के बाद कपड़े की लंबाई और चौड़ाई बदल जाती है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि "कपड़े के फिनिशिंग के बाद  कपड़े के आयाम (लंबाई और चौड़ाई) में होने वाले परिवर्तनों को प्रतिशत के रूप में व्यक्त किया जाता है, इसे कपड़े की आयामी स्थिरता कहा जाता है"। इसे ताना दिशा (लंबाई) और बाने दिशा (चौड़ाई) में अलग-अलग निर्धारित किया जाता है। यह निम्नलिखित कारकों से बहुत प्रभावित होता है:

यार्न काउंट  और कंस्ट्रक्शन:

कपड़े के कंस्ट्रक्शन  का कपड़े की आयामी स्थिरता पर बहुत प्रभाव पड़ता है। निर्माण के प्रभाव को निम्नलिखित उदाहरण से समझा जा सकता है:

मान लीजिए कि दो कपड़े ए और बी हैं। दोनों कपड़ों में एक ही जीएसएम, वार्प काउंट, वेफ्ट  काउंट, यार्न में प्रयुक्त सामग्री और प्रति वर्ग इंच धागे की संख्या समान है। फैब्रिक ए में बी की तुलना में प्रति इंच अधिक सिरा होता है, और फैब्रिक ए में बी की तुलना में प्रति इंच कम पिक्स होता है। कपड़े ए में वज़न दिशा (चौड़ाई के अनुसार) में सिकुड़न कपड़े बी से कम होगी। कपड़े ए में संकुचन  ताना दिशा (लंबाईवार) कपड़ा B से अधिक होगी।

सामग्री का प्रकार:

कपड़े में प्रयुक्त सामग्री का प्रकार कुछ हद तक कपड़े की आयामी स्थिरता को प्रभावित करता है। यदि सूत को महीन और लंबे स्टेपल रेशों से काता गया है, तो यह बेहतर आयामी स्थिरता देगा। पॉलिएस्टर फाइबर कपास फाइबर की तुलना में बेहतर आयामी स्थिरता दिखाता है।

यार्न ट्विस्ट:

यार्न ट्विस्ट की डिग्री एक कपड़े की आयामी स्थिरता पर बहुत प्रभाव डालती है। यदि दो कपड़े की यार्न काउंट  और कंस्ट्रक्शन  समान हैं, तो कम ट्विस्ट यार्न वाले कपड़े की तुलना में उच्च ट्विस्ट यार्न वाले कपड़े में अधिक आयामी परिवर्तन होगा। जब यह आराम के रूप में आता है तो उच्च ट्विस्ट  यार्न हमेशा सिकुड़ता है। यार्न की यह प्रवृत्ति कपड़े को सिकोड़ने में मदद करती है।

फैब्रिक वीव:

कपड़े की वीव  भी कपड़े की आयामी स्थिरता में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। लंबी फ्लोट लंबाई वाली वीव  छोटी लंबाई वाली फ्लोट बुनाई की तुलना में अधिक संकुचन  प्रतिशत देती है। वफ़ल और साटन जैसे बुनाई धोने के बाद अधिक सिकुड़ते हैं।

ग्राम प्रति वर्ग मीटर:

प्रति वर्ग मीटर कपड़े का वजन धोने के बाद संकोचन प्रतिशत को सीधे प्रभावित करता है। प्रति मीटर कम वजन वाले कपड़े हमेशा उच्च वजन वाले कपड़े से अधिक सिकुड़ते हैं। यह कम वजन के कपड़े में मौजूद अधिक खुले स्थान (वायु स्थान) के कारण होता है। एंड्स  और पिक्स धोने के बाद एक दूसरे के काफी करीब आ जाते हैं। यह तभी संभव है जब कपड़े में खुली जगह हो।

कपड़े का हैंडल, बुने हुए कपड़े के कपड़े के गुण ( HANDLE OF THE FABRIC, FABRIC PROPERTIES OF WOVEN FABRIC )

 कपड़े का  हैंडल, बुने हुए कपड़े के कपड़े के गुण

 

कपड़े का हैंडल:

 "कपड़े का हैंडल हमें कपड़े की कोमलता, कठोरता, , चिकनाई या खुरदरापन की डिग्री के बारे में बताता है।" इसे केवल हाथ से कपड़े को छूकर जज किया जाता है। निम्नलिखित कारक सीधे कपड़े के हैंडल को प्रभावित करते हैं:

प्रयुक्त सामग्री का प्रकार: 

कपड़े का हैंडल सीधे कपड़े में प्रयुक्त सामग्री के प्रकार से जुड़ा होता है। यदि यार्न में लंबे स्टेपल और कम माइक्रोनेयर मूल्य वाले फाइबर होते हैं, तो कपड़े में उच्च स्तर की कोमलता दिखाई देती है। यदि कपड़े को छोटे स्टेपल, और उच्च माइक्रोनेयर वैल्यू फाइबर के साथ बुना जाता है, तो यह उपयोगकर्ता को एक कठोरता का  अनुभव देता है।

यार्न ट्विस्ट: 

यार्न ट्विस्ट की डिग्री (मात्रा ) कपड़े की फील  और स्पर्श को बहुत प्रभावित करती है। यदि हम समानयार्न काउंट  और संरचना वाले दो कपड़े बुनते हैं और हम एक कपड़े में उच्च ट्विस्ट यार्न और दूसरे कपड़े में कम ट्विस्ट यार्न का उपयोग करते हैं। लो ट्विस्ट यार्न से बुने हुए फैब्रिक हाई ट्विस्टेड यार्न से बुने हुए फैब्रिक की तुलना में अधिक सॉफ्ट फील और टच देते हैं।

कपड़ा की संरचना: 

कपड़े का निर्माण (एंड्स प्रति  और पिक्स प्रति इंच ) कपड़े के स्पर्श और फील  को प्रभावित करता है। यदि एक कपड़े में 30s x 30s, 72 x 68 निर्माण और इस कपड़े के समकक्ष 28s x 28s, 70 x 66 का निर्माण होता है। दोनों कपड़े का GSM लगभग बराबर होगा लेकिन दूसरे कपड़े का स्पर्श और स्पर्श पहले कपड़े की तुलना में दूसरे कपड़े में अधिक वायु स्थान मौजूद होने के कारण बेहतर होगा ।

कपड़े का वजन प्रति वर्ग इकाई

वजन प्रति वर्ग इकाई (ग्राम प्रति वर्ग मीटर या ग्राम प्रति वर्ग गज) भी कपड़े के स्पर्श और अनुभव को प्रभावित करता है। यदि किसी फैब्रिक को दिए गए फैब्रिक कंस्ट्रक्शन के आधार पर  बुना गया है। यदि बुनकर प्रति इंच पिक्स बढ़ाकर कपड़े के जीएसएम या जीवाईएम को थोड़ा बढ़ा देता है, तो कपड़े का अनुभव भी पिछले कपड़े की तुलना में थोड़ा कठोर  हो जाता है।

कपड़े की वीव: 

कपड़े की बुनाई सीधे कपड़े के स्पर्श और फील  को प्रभावित करती है। एक उपयोगकर्ता एक ही काउंट  और कंस्ट्रक्शन  के दो कपड़ों के बीच तुलना कर सकता है और केवल बुनाई का अंतर होता है। साटन वीव  में प्लेन   वीव  की तुलना में बेहतर फील  और स्पर्श होता है। यह कैसे होता है? इसे ताना और बाने की फ्लोट लंबाई के आधार पर समझाया जा सकता है। प्लेन वीव  में न्यूनतम फ्लोट लंबाई होती है और साटन वीव  में प्लेन वीव  की तुलना में अधिक फ्लोट लंबाई होती है। फ्लोट की बड़ी लंबाई के कारण, साटन वीव, प्लेन वीव  की तुलना में एक नरम एहसास देती है।

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